नीरज

कुछ अनमोल दोहे नीरज के

कारवाँ गुजर गया...!

मंगलवार, 24 जून 2008
मुझे न करना याद, तुम्हारा आँगन गीला हो जाएगा। रोज़ रात को नींद चुरा ले जाएगी पपीहों की टोली, रोज़ प्रा...

अब तुम रूठो....

शनिवार, 19 अप्रैल 2008
अब तुम रूठो, रूठे सब संसार, मुझे परवाह नहीं है। दीप, स्वयं बन गया शलभ अब जलते-जलते,

किसलिए आऊं तुम्हारे द्वार ?

शनिवार, 19 अप्रैल 2008
जब तुम्हारी ही हृदय में याद हर दम, लोचनों में जब सदा बैठे स्वयं तुम,
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