पाकिस्तानी सेना ने सफाईकर्मी के लिए सिर्फ गैर-मुसलमानों से मांगे आवेदन, भड़का गुस्सा

रविवार, 2 सितम्बर 2018 (18:10 IST)
हमारे पड़ोसी देश पाकिस्‍तान में गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव वाली घटनाएं सामने आती रहती हैं। पाकिस्‍तान रेंजर्स का एक वायरल विज्ञापन ऐसी ही एक घटना की पुष्टि करता है। दरअसल, पाकिस्‍तान रेंजर्स ने खाली पदों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकला है। लेकिन इसमें कुछ पद ऐसे हैं जिनके आगे साफतौर पर लिखा है कि सिर्फ गैर-मुस्लिम व्‍यक्ति ही इनके लिए आवेदन करें। इनमें टेलर, नाई, बढ़ई, पेंटर, वाटर करियर, जूता बनाने वाला और सफाईकर्मी के जैसे पद शामिल हैं।

हेडक्‍वार्टर पाकिस्‍तान रेंजर्स (सिंध) की ओर से जारी यह विज्ञापन पाकिस्‍तान के अखबारों में प्रकाशित किया गया था। पाकिस्‍तान के मशहूर अखबार डॉन के 26 अगस्त के अंक में भी यह प्रकाशित किया गया।

इसके बाद अल्‍पसंख्‍यक अधिकारों के लिए लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता कपिल देव ने इसे ट्विटर पर शेयर किया और लिखा- ‘तो पाकिस्‍तान में सफाईकर्मी की नौकरी पाने के लिए आपका गैर मुस्लिम होना ही जरूरी है। आपका काम सिर्फ गंदगी फैलाना है और हमारा केवल सफाई करना।’

So, the criteria for job of a sweeper/sanitary workers in Pakistan is just you should be "NON-MUSLIM ONLY"!!

Your job is to make filth only, and our is to clean only! pic.twitter.com/NxuAILWu87

— Kapil Dev (@KDSindhi) August 30, 2018


जल्द ही, विज्ञापन की तस्‍वीरें पूरे सोशल मीडिया में वायरल होने लगीं और गैर मुस्लिम लोगों के साथ ही मुस्लिमों ने भी इसका विरोध किया।

हमजा सरवानी नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा- ‘यह कई स्‍तरों पर गलत है। हम एक देश, एक नागरिक और एक समान हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारी जाति और धर्म क्‍या है।’

This is wrong on so many levels. We cannot have this coming from our Para-military forces @AsimBajwaISPR. We are one nation. One people. Equal. No matter the race, religion or creed. Pakistan Zindabad. https://t.co/Rrflr3qQgA

— Hamza Sarwani (@hamzasarwani) September 1, 2018


वहीं, ImyR नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा- ‘अगर यह सच है, तो यह बहुत बुरा है। यह मानवता, इस्लाम में निर्धारित समानता और पाकिस्तान के संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्रतिबद्धता के भी खिलाफ है।’

If this is true then no words 2 describe how bad it is - goes against the principles of humanity/equality set out in Islam and the Constitution of Pakistan. Also, goes against the commitment made by PM @ImranKhanPTI @ShehryarAfridi1 @ShireenMazari1 @OfficialDGISPR @PTIofficial https://t.co/AJYm24ymMc

— ImyR (@imyrathore) September 1, 2018


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