क्या मोदी सरकार 15 अगस्त को फ्री हेलमेट बांट रही है..

मंगलवार, 24 जुलाई 2018 (14:53 IST)
दुनिया में आपको ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जो दूसरों को उल्लू बनाकर अपना उल्लू सीधा करने की फिराक में रहते हैं। लेकिन अब सोशल मीडिया ने उनका यह काम और आसान कर दिया है। व्हाट्सएप पर वायरल एक मैसेज इसी बात का उदाहरण है। इस वायरल मैसेज में मोदी सरकार की तरफ से फ्री में हेलमेट बांटने की योजना का दावा करते हुए लिखा गया है- ‘बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से नि:शुल्क हेलमेट वितरित किए जा रहे हैं। सभी हेलमेट 15 अगस्त को आपके नजदीकी स्कूल में वितरण किए जाएंगे, जल्दी आवेदन करें’। इस मैसेज में एक लिंक भी दिया गया है- http://helmet.pm-yojna.in
 
आइए जानते हैं.. इस लिंक पर क्लिक करने पर क्या होता है..
 
लिंक पर क्लिक करते ही एक फॉर्म सामने आ जाता है, जिसके सबसे ऊपर लिखा है- ‘प्रधानमंत्री सड़क सुरक्षा योजना’। आगे लिखा है कि सड़क दुर्घटनाओं से बचाने के लिए केंद्र सरकार मुफ्त हेलमेट बांट रही है। हेलमेट पाने के लिए फॉर्म में अपना नाम, बाइक का नंबर और राज्य का नाम लिखें। फिर लिखा है कि सभी हेलमेट 15 अगस्त को नजदीकी सरकारी स्कूल में बांटे जाएंगे।
 
यह फॉर्म भरने के बाद हमने रजिस्टर बटन पर क्लिक किया, तो हमें एक मैसेज दिखाई दिया- ‘हमें आपका आवेदन सफलतापूर्वक प्राप्त हो गया है। आवेदन की पुष्टि के लिए कृपया नीचे दी हुई प्रक्रिया पूरी करें’। आगे लिखा है- ‘वेरिफिकेशन के लिए आपको व्हाट्सएप पर 10 दोस्तों को शेयर करना पड़ेगा। इसके पश्चात नीचे बटन पर क्लिक करके अपना ऑर्डर नंबर प्राप्त करें’।
 
फिर हमने व्हाट्सएप पर 10 दोस्तों को शेयर भी कर दिया, और जैसे ही ‘ऑर्डर नंबर प्राप्त करें’ बटन पर क्लिक किया, तो एक मैसेज पॉप-अप हुआ- ‘धन्यवाद, आपका ऑर्डर प्राप्त हो गया है! आपका ऑर्डर नंबर xyz है। कृपया इसे किसी सुरक्षित स्थान पर लिख दें’। ‘सभी हेलमेट 15 अगस्त को नजदीकी सरकारी स्कूल में वितरित किए जाएंगे, उस दिन अपना ऑर्डर नंबर अपने पास रखें’।
 
इन सब प्रक्रिया में गौर करने वाली बात यह है कि प्रत्येक स्टेप के पेज पर कुछ कमर्शियल विज्ञापन जरूर थे। जबकि सरकारी वेबसाइटों पर कमर्शियल विज्ञापनों की मनाही है। साथ ही, उपरोक्त URL में ‘https’ की जगह ‘http’ लिखा है। ‘https’ में s का मतलब सिक्योरिटी से होता है। जिन वेबसाइट्स के URL पर सिर्फ ‘http’ होता है वे सिक्योर नहीं होती हैं। मतलब साफ है.... यह सरकारी नहीं बल्कि फेक वेबसाइट है!
 
अब जानते हैं कि क्या सच में ‘प्रधानमंत्री सड़क सुरक्षा योजना’ नाम की कोई योजना है भी कि नहीं। हमारी पड़ताल में हमें इस नाम की कोई सरकारी योजना नहीं मिली, बल्कि ‘प्रधानमंत्री सुरक्षित सड़क योजना’ मिली जो साल 2016 में लॉन्च की गई थी। इस योजना के तहत बेहतर डिजाइन और रोड इंजिनियरिंग के जरिए हाइवे पर ऐसी खतरनाक जगहों को ठीक करने की कोशिश की जा रही है, जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं।
 
अब सवाल है कि यह मैसेज बनाया क्यों गया है..
 
दरअसल इस फर्जी वेबसाइट को उसकी हिट्स, मतलब यह वेबसाइट कितनी बार खोली गई, के हिसाब से विज्ञापन मिलते हैं और इन विज्ञापनों से साइट को फिर पैसा मिलता है। इसलिए इन मैसेजेस में ज्यादा से ज्यादा शेयर करने की बात कही जाती है ताकि वेबसाइट को ज्यादा हिट्स मिलें। कई फर्जी वेबसाइट इस तरह से आपकी निजी जानकारियां भी इकट्ठा कर लेती हैं और उन जानकारियां के माध्यम से आपको आसानी से ठगी का शिकार बना लेते हैं।

हमारी सलाह है.. सचेत रहिए.. और मुफ्त की चीजों के फेर में न पड़ें।

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