शेरो-अदब

ग़ालिब की ग़ज़ल : ख़ाक हो जाएँगे हम, तुमको ख़बर होने तक
नई दिल्ली। उर्दू शायरी को दो संस्कृतियों के मिलने का ज़रिया मानने की हामी रही कामना प्रसाद ने अब इस ...
एक अदीब या साहित्‍यकार का अनजाने में ही न जाने किस-किस से रिश्‍ता होता है। कभी किसी की आँख में आँसू ...
मैं ज़िंदगी की दुआ माँगने लगा हूँ बहुत, जो हो सके तो दुआओं को बेअसर कर दे।।
बहुत अहम है मेरा काम नामाबर1 कर दे मैं आज देर से घर जाऊँगा ख़बर कर दे
नुक्ताचीं हैं ग़मे-दिल उसको सुनाये न बने , क्या बने बात, जहाँ बात बनाये न बने
इश्क़ मुझको नहीं, वहशत ही सही मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही
उलटी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया देखा इस बीमारि-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
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