ग़ालिब की ग़ज़ल : ख़ाक हो जाएँगे हम, तुमको ख़बर होने तक

27 से दूरदर्शन पर बयां होगी 'दास्तान-ए-उर्दू'

नई दिल्ली। उर्दू शायरी को दो संस्कृतियों के मिलने का ज़रिया मानने की हामी रही कामना प्रसाद ने अब इस ...

उर्दू शायरी के बाबा आदमः वली दकनी

रंगों की बौछार से शायर भी नहीं बचे

न जाने किस-किस से रिश्‍ता होता है अदीब का

बुधवार, 7 अगस्त 2013
एक अदीब या साहित्‍यकार का अनजाने में ही न जाने किस-किस से रिश्‍ता होता है। कभी किसी की आँख में आँसू ...

देख बहारें होली की

मैं ज़िंदगी की दुआ माँगने लगा हूँ

मैं ज़िंदगी की दुआ माँगने लगा हूँ बहुत, जो हो सके तो दुआओं को बेअसर कर दे।।

तेरे माथे पर कोई, मेरा मुक़द्‍दर देखता

बस तेरी याद ही काफी है मुझे

अज़ीज़ अंसारी की ग़ज़ल

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