नज्म : मेरे महबूब !

नज़्म - कली का मसलना देखा

नज़्म - कली क्यूं झरे

मीना कुमारी ने लिखी थी यह 5 गजलें ...

पढ़ि‍ए, निदा फाज़ली की 5 मशहूर नज़्में

जश्न-ए-आजादी : भारत की तरक्की रुक नहीं सकती...

नज़्म---'निसार करूँ'

जाँ निसार अख़्तर की नज़्म 'एहसास'

मैं कोई शे'र न भूले से कहूँगा तुझ पर फ़ायदा क्या जो मुकम्मल तेरी तहसीन न हो कैसे अल्फ़ाज़ के साँचे मे

नज़्म 'बलूग़त' (वयस्क)

मेरी नज़्म मुझसे बहुत छोटी थी खेलती रहती थी पेहरों आग़ोश में मेरी आधे अधूरे मिसरे मेरे गले में बाँहें...

रुबाइयाँ : मेहबूब राही

हर बात पे इक अपनी सी कर जाऊँगा जिस राह से चाहूँगा गुज़र जाऊँगा जीना हो तो मैं मौत को देदूँगा शिकस्त ...
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