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टेनिस में 2017 में युवा ब्रिगेड ने उम्मीद जगाई लेकिन व्यवस्था ने किया निराश

हमें फॉलो करें टेनिस में 2017 में युवा ब्रिगेड ने उम्मीद जगाई लेकिन व्यवस्था ने किया निराश
नई दिल्ली , शनिवार, 23 दिसंबर 2017 (15:40 IST)
नई दिल्ली। भारत के युवा खिलाड़ियों ने वर्ष 2017 में कुछ शीर्ष एकल प्रतिद्वंद्वियों पर जीत दर्ज की जबकि रोहन बोपन्ना ने पहला ग्रैंडस्लैम अपने नाम किया और सानिया मिर्जा के शीर्ष से नीचे की ओर खिसकने की शुरुआत हो गई। भारतीय टेनिस के लिए यह साल मिला-जुला रहा जिसमें न तो बुलंदियों के शिखर पर पहुंचे और न ही नाकामी की गर्त में। युवाओं के जज्बे ने उम्मीदें कायम रखीं।
 
युकी भांबरी, रामकुमार रामनाथन और सुमीत नागल ने इस साल सफलताएं अर्जित कीं। उन्हें अपनी क्षमता के सही इस्तेमाल और लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए देश में खेल के प्रशासकों से जिस समर्थन और हौसला-अफजाई की जरूरत है, वह उन्हें नहीं मिला। पूरे सत्र में भारत में सिर्फ 2 चैलेंजर टूर्नामेंट पुणे और बेंगलुरु में खेले गए। युकी ने पुणे चैलेंजर जीता और नागल ने बेंगलुरु में जीत दर्ज की। इस नतीजे से दोनों की रैकिंग में काफी सुधार आया।
 
चोटों से प्रभावित रहे युकी ने इस साल की शुरुआत 500 से कम रैंकिंग अंकों के साथ की थी लेकिन वे एकल रैंकिंग में 114वें स्थान पर पहुंचे, वही नागल 90 पायदान की छलांग लगाकर अब 223वें स्थान पर हैं। पुणे में फाइनल देश के 2 शीर्ष युवा खिलाड़ियों के बीच खेला गया जिसमें युकी ने रामकुमार को हराया।
 
सवाल यह है कि एआईटीए देश में कम से कम 5 चैलेंजर टूर्नामेंट भी क्यों नहीं करा पा रहा। भारत में टेनिस के लिए पैसा जुटाना कठिन है लेकिन एमएसएलटीए लगातार कॉर्पोरेट और सरकारी सहयोग से इसका आयोजन कर रहा है। एमएसएलटीए ने महिलाओं के 6 टूर्नामेंटों का आयोजन किया जिनमें 1 डब्ल्यूटीए टूर्नामेंट शामिल था। इसके अलावा पुरुष चैलेंजर और फरवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ डेविस कप मुकाबला शामिल है।
 
भारत में पुरुषों के सिर्फ 9 आईटीएफ फ्यूचर्स टूर्नामेंट और महिलाओं के 6 आईटीएफ टूर्नामेंट खेले गए। खिलाड़ियों की जरूरतों को लेकर एआईटीए मूकदर्शक बना रहा और धनराशि जुटाने के लिए खेल मंत्रालय में कुछ मुलाकातों के अलावा उसने कुछ नहीं किया। 
मंत्रालय ने यह कहकर उसकी मांग खारिज कर दी कि टेनिस की शीर्ष इकाई होने के नाते टूर्नामेंटों की मेजबानी के लिए पैसा जुटाना एआईटीए की जिम्मेदारी है।
 
भारतीय युवाओं ने व्यवस्था से सहयोग नहीं मिलने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया। युकी भांबरी ने अमेरिका में एटीपी सिटी ओपन में दुनिया के 22वें नंबर के खिलाड़ी गाएल मोंफिल्स को हराया, वहीं रामकुमार ने दुनिया के 8वें नंबर के खिलाड़ी डोमिनिक थिएम को तुर्की में अंताल्या ओपन में मात दी।
 
लिएंडर पेस और महेश भूपति की छत्रछाया में अक्सर दबे रहे रोहन बोपन्ना ने कनाडा की गैब्रियला डाबरोवस्की के साथ फ्रेंच ओपन मिश्रित युगल खिताब जीता। वे ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय हो गए और युगल रैंकिंग में लगातार शीर्ष 20 में रहे हैं। उन्होंने 3 एटीपी खिताब जीते जिनमें मोंटे कार्लो मास्टर्स शामिल था। दिविज शरण ने पूरव राजा से जोड़ी टूटने के बावजूद एटीपी यूरोपीय ओपन और चैलेंजर सर्किट पर 2 खिताब जीते।
 
पिछले 2 सालों में शानदार प्रदर्शन करने वाली सानिया मिर्जा ने शीर्ष रैंकिंग गंवाई और शीर्ष 10 में भी अब वे नहीं हैं। मार्तिना हिंगिस से अलग होने के बाद सानिया को सही जोड़ीदार नहीं मिल सका। शुआई पेंग के साथ वे अमेरिकी ओपन सेमीफाइनल तक पहुंचीं। इस साल 8 जोड़ीदार बदलने वाली सानिया 1 भी ग्रैंडस्लैम नहीं जीत सकी।
 
लिएंडर पेस ने इस साल लगातार 2 चैलेंजर खिताब जीते। नए डेविस कप कप्तान महेश भूपति ने अप्रैल में उज्बेकिस्तान के खिलाफ बेंगलुरु में हुए मुकाबले के लिए उन्हें टीम में शामिल नहीं किया। पेस को डेविस कप के इतिहास में सबसे ज्यादा युगल मैच जीतने वाला खिलाड़ी बनने के लिए 1 जीत की जरूरत है। देखना यह है कि 2018 में वे निकोला पीट्रांजेली का रिकॉर्ड तोड़ पाते हैं या नहीं? (भाषा) 

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