हिंसा एवं बाहुबल से सामाजिक सरोकार की आवाज को नहीं दबाया जा सकता

सुनियोजित भीड़ द्वारा समाजसेवी एवं समाज सुधारक स्वामी अग्निवेश पर किए हिंसक हमले ने देश में वैचारिक स्वतंत्रता को हिंसा की ताकत से कुचलने के षड्यंत्र ने दुनिया में गांधी के देश पर कालिख लगा दी है।
 
आज दुनिया में भारत को गांधीजी के द्वारा किए गए अहिंसात्मक कार्यों के कारण ख्याति प्राप्त है और दुनिया गांधी के रास्ते पर अमन-चैन स्थापित करने के प्रयास में जुटी है, वहीं गांधी के देश में विचारों और सिद्धांतों का जवाब अगर बाहुबल एवं हिंसा के माध्यम से देकर विचारधारा को कुचल देंगे तो हिंसा के समर्थक गलत मुगालते में हैं। अभी सभी शांतिप्रिय अहिंसावादी लोगों/संगठनों को साथ आकर इस कुचक्र से देश को निकालने की जरूरत है। यदि समय रहते इस नियोजित भीड़ को हिंसक आक्रमणों से रोकने के माकूल कदम नहीं उठाए गए तो यह देश की सद्भावना के लिए बड़ा खतरा हो सकता हैं। ये बातें एकता परिषद की राष्ट्रीय समिति द्वारा स्वामी अग्निवेश पर हुए हिंसक हमले के बाद आयोजित आपात बैठक में एकता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रनसिंह परमार ने कहीं।
 
ज्ञातव्य है कि एकता परिषद शांति, सद्भाव, भाईचारे और न्याय पर आधारित नए समाज की रचना के लिए समर्पित एक जन संगठन है। हमारे देश में विविधि सम्प्रदाय, जाति, समुदाय, वर्ग, वेशभूषा, भाषा सभी को स्वतंत्रतापूर्वक जीने एवं अपने विचार रखने की स्वतंत्रता है। इस अधिकार को दबाने का मतलब संवैधानिक अधिकारों को बाहुबल से कुचलना है, जिसकी हमारा संविधान इजाजत नहीं देता इसलिए राज्यों एवं केंद्रीय सरकार का दायित्व है कि देश में सद्भावना का माहौल बनाने के लिए सभी वर्गों को समान स्थान प्रदान करे। 
 
वयोवृद्ध गांधीवादी और राष्ट्रीय गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचंद्र राही ने सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर किए गए हमले की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। राही ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि हमारा समाज और देश आज वास्तव में किस दिशा में जा रहा है।
 
देशभर में महात्मा गांधी की विरासत संजोने और संवारने की जिम्मेदारी निभाने वाली संस्था के अध्यक्ष राही ने कहा कि जिन लोगों ने स्वामी अग्निवेश जैसे शांतिप्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के साथ जिस तरह की हरकत की है, उससे यह साबित होता है कि प्रतिक्रियावादी और असहिष्णु ताकतें किस हद तक देश में अपना सिर उठा चुकी हैं। इन्हें रोका जाना अत्यंत आवश्यक है, खासतौर से गांधी के देश में ऐसी ताकतों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
 
इंदौर की सामाजिक एवं रचनात्मक संस्थाओं ने भी स्वामी अग्निवेश पर हुए इस हमले की घोर निंदा की है। कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट, विसर्जन आश्रम, गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, मध्यप्रदेश सेवक संघ, मध्यप्रदेश सर्वोदय मंडल, सेवा सुरभि, सर्वोदय शिक्षण समिति आदि संस्थाओं ने कहा है कि गांधी के देश में इस तरह की घटनाएं संविधान की भावनाओं के खिलाफ है। हमें पूरी ताकत के साथ संविधान में लिएसंकल्पों को पुख्ता करने के लिए काम करने की जरूरत है। 

साभार- सर्वोदय प्रेस सर्विस 

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