एक जेल जहां कैदियों को हासिल है गृहस्थी बसाने, काम पर बाहर जाने की आजादी

रविवार, 9 सितम्बर 2018 (20:08 IST)
इंदौर। बरसों पुरानी तंग काल कोठरी की जगह दो कमरों का नया-नवेला घर, जिसमें परिवार के साथ रहने का सुख और इसके साथ ही दिन भर बाहर काम करने की स्वतंत्रता-यह उस खुली जेल की तस्वीर है, जिसे यहां सजायाफ्ता कैदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मकसद के तहत शुरू किया गया है।


जिला जेल के पास हाल ही में शुरू की गई खुली जेल को आधिकारिक तौर पर 'देवी अहिल्याबाई खुली कॉलोनी' नाम दिया गया है। फिलहाल इसमें 10 विवाहित कैदियों को स्वतंत्र अपार्टमेंट दिए गए हैं। इन्हीं में से एक अपार्टमेंट में भूपेंद्र सिंह (45) ने रविवार से अपनी गृहस्थी बसाई है।

मध्यप्रदेश के शाजापुर कस्बे के इस निवासी को पारिवारिक विवाद में एक युवक की हत्या के वर्ष 1996 के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी। पिछले साढ़े बारह साल के दौरान वह सूबे की अलग-अलग जेलों में बंद रहे हैं।

उन्होंने बताया, 'उम्रकैद की मेरी सजा पूरी होने में फिलहाल कुछ समय बाकी है लेकिन खुली जेल में आने के बाद मुझे लग रहा है कि मेरी अभी से रिहाई हो गई है। मुझे अपने जुर्म पर पछतावा है और अब मैं आम नागरिक की तरह जीवन बिताना चाहता हूं।'

सिंह ने बताया, 'चूंकि खुली जेल में रहने के कारण मुझे बाहर काम करने की आजादी भी है, लिहाजा मैं शहर में चाय-नाश्ते की दुकान खोलने की तैयारी कर रहा हूं।' खुली जेल में उनकी पत्नी सीमा (35) भी उनके साथ रह रही हैं। इस दम्पति के दो बेटे हैं, जो इंदौर से बाहर पढ़ रहे हैं। अगले शैक्षणिक सत्र से उनका दाखिला किसी स्थानीय स्कूल में कराया जाएगा और वे भी अपने माता-पिता के साथ खुली जेल में रह सकेंगे।  

सीमा ने कहा, 'मैं अपने पति से बरसों दूर रही हूं और अपने दोनों बेटों की परवरिश की है लेकिन हम खुश हैं कि हमारा परिवार अब साथ रह सकेगा।'

इस बीच, जिला और सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार श्रीवास्तव ने खुली जेल के प्रयोग को सराहा है। उन्होंने कहा, 'कई बार ऐसा होता है कि क्षणिक आवेग के कारण लोग गंभीर अपराध कर बैठते हैं। ऐसे लोग जब सजा के दौरान लम्बे समय तक सामान्य जेलों में बंद रहते हैं, तो उनमें मन में सामाजिक तंत्र से बगावत और अन्य नकारात्मक भावनाएं घर कर जाती हैं। इन लोगों को नकारात्मक भावनाओं से बचाकर उनकी सामाजिक बहाली के लिए खुली जेल का प्रयोग सर्वश्रेष्ठ विकल्प है।'
श्रीवास्तव ने कहा, 'खुली जेल में सजा पूरी करने के बाद जब कैदी रिहा होंगे तो वे समाज को और समाज उनको बेहतर तरीके से अपना सकेगा।' खुली जेल जिला जेल की प्रशासकीय निगरानी में शुरू की गई है।
 
जिला जेल की अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने बताया, 'उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक प्रदेश में खुली जेलों का प्रयोग शुरू किया गया है। इन जेलों में अच्छे बर्ताव वाले उन कैदियों को रखा जाता है, जिन्हें गंभीर अपराधों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई हो और इस दंड की अवधि एक से दो साल में खत्म होने वाली हो।'
 
उन्होंने बताया कि खुली जेल में रहने वाले सभी कैदी सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक इस परिसर के बाहर काम कर सकते हैं लेकिन इस दौरान उन्हें शहर की सीमा लांघने की इजाजत नहीं है।
 
चतुर्वेदी ने बताया कि जेल प्रशासन ने पूरी कोशिश की है कि खुली जेल का माहौल इसके नाम के मुताबिक रहे। फिर भी इसमें रहने वाले कैदियों और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए तीन प्रहरियों की तैनाती की गई है। ये प्रहरी जेल में आने-जाने वाले लोगों का पूरा रिकॉर्ड रखेंगे। (भाषा)

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