ऑल इंडिया मीडिया एजुकेटर्स कॉन्फ्रेंस संपन्न

गुरुवार, 12 जुलाई 2018 (17:39 IST)
जयपुर। 18वीं शताब्दी में मीडिया ने लोकतंत्र को स्थापित किया। लोकतंत्र के बगैर आधुनिक मीडिया जीवित नहीं रह सकता। आज टीवी चैनलों के बीच टीआरपी बढ़ाने के लिए होड़ मची है और समाचार चैनल सनसनी परोस रहे हैं।
 
यह बात उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि एवं राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षामंत्री वासुदेव देवनानी ने 6 से 8 जुलाई तक आयोजित तीसरी अखिल भारतीय मीडिया एजुकेटर्स कॉन्फ्रेंस में कहीं। 
 
कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह के मुख्य अतिथि कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत ने कहा कि  देश बदलाव के दौर से गुजर रहा है, इस दौर में तकनीक हर जगह हावी है। मीडिया तकनीक का दुरुपयोग देश व दुनिया के लिए चिन्ता का सबब बन रहा है। ऐसे में बतौर मीडिया शिक्षक सभी स्टेक होल्डर्स की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
 
समापन समारोह से पहले आयोजित प्लेनरी सेशन में राजस्थान सरकार की महिला और बाल विकास मंत्री अनिता भदेल ने कहा कि राजस्थान में अभी भी 60 प्रतिशत बाल विवाह होते हैं। एक बाल विवाह कैसे बच्चियों की जिंदगी बर्बाद कर देता है यह माता-पिता व दादा-दादियों को सोचना पड़ेगा। हमारा समाज उल्टा चल रहा है। बेटियों पर कम ध्यान दिया जा रहा है। उनके शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता में नहीं रखा जाता जबकि बेटों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। अगर एक मां शिक्षित है तो वह बहुत अच्छा समाज बना सकती है।
 
उदयपुर के अतिरिक्त जिला और सेशन न्यायाधीश महेन्द्र दवे ने बलात्कार के विभिन्न कानूनी और नैतिक पक्षों पर चर्चा की। कोबरा पोस्ट डॉट कॉम के संस्थापक अनिरुद्ध बहल ने स्टिंग ऑपरेशन और मीडिया परिदृश्य पर चर्चा की। 
 
कॉन्फ्रेंस के आयोजक एवं सचिव कल्याणसिंह कोठारी ने सभी अतिथियों का बुके देकर स्वागत किया एवं आगमन पर आभार जताया।
 
कोठारी ने बताया कि जनसंचार केंद्र के अध्यक्ष प्रो. संजीव भानावत के सम्मान में किताब का विमोचन किया गया एवं उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया। इसके साथ ही कॉन्फ्रेंस में अन्य लेखकों की चार पुस्तकों का विमोचन भी अतिथियों ने किया।
 
कॉन्फ्रेंस में भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के महानिदेशक केजी सुरेश, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के कुलपति एमएस परमार, कुलपति डॉ. मृदुल हजारिके, यूनिसेफ राजस्थान के चीफ फील्ड ऑफिसर इसाबेल बारडेम, रूबेन बनर्जी, प्रो. शाहीद रसूल, जयश्री जेठवानी, संजय निराला, प्रो. राजन महान, प्रो. केबी. कोठारी, पत्रकार शेवंती नैनन, डॉ. विपुल, डॉ. उमाशंकर पांडे, प्रो. उज्ज्वल चौधरी, प्रो. पुष्पेन्द्रपाल सिंह, ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मीडिया विंग के अध्यक्ष करुणा भाई समेत कई अन्य मीडिया शिक्षकों ने टेलीविजन के बदलते रूप, मीडिया के राजनीतिक अर्थशास्त्र, मीडिया शिक्षण, वैकल्पिक मीडिया के प्रभाव, सिनेमा, विकास और मीडिया, सोशल मीडिया आदि विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
 
इस तीन दिवसीय कांफ्रेस के दौरान पद्मभूषण कोमल कोठारी की स्मृति में जोधपुर स्थित रूपायन संस्थान और राजस्थान संगीत नाटक अकादमी की ओर से नाहरगढ़ किले पर राजस्थान के लोक कलाकारों की प्रस्तुति हुई। साथ ही संगीत आईकॉन भूपेन हजारिका को याद करते हुए मुंबई के बेनियन ट्री बैंड ने गीतों की प्रस्तुति दी। कॉन्फ्रेंस में देश  के 19 राज्यों के करीब 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि 160 प्रतिभागियों ने शोध पत्र विभिन्न सत्रों में पढ़े। 

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