केरल से खास : यहां हर जान की कीमत है, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार के साथ बचाए जा रहे हैं जानवर भी...

प्राकृतिक आपदाएं चेहरा, धर्म, स्थिति-परिस्थितियों को नहीं देखती...बस कहर बनकर बरसती हैं और छीन ले जाती है चैन, सुकून, खुशियां, सिर से छत और कई जिंदगियां...। कहते हैं जब मानवता अपना अस्तित्व छोड़ती है, तो प्रकृति कहर बन जाती है... लेकिन केरल के हालात कुछ और ही बयां करते हैं - कि जब प्रकृति कहर बरपाती है, तो कई बार मानवता खुद ईश्वर का फर्ज निभाती है...। 
 
जी हां, तबाही और बेचैन कर देने वाली खबरों बीच, इन विपरीत परिस्थितियों में केरल से आने वाली कुछ खबरें आंसुओं के बीच खिलती मुस्कान सी लगती हैं, अंधकार के बीच जगह बनाती रोशनी सी लगती हैं। ऐसी ही हैं ये 5 कहानियां जो कहती हैं कि इंसानियत अब भी जिंदा है, अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में -   

 
1. कलयुगी समाज में जब इंसान, इंसान को मार रहा है, छल रहा है, स्वार्थी प्राणी के रूप में अपनी ही दुनिया में कैद है, वहां प्राणियों के लिए उदारता राहत देती है...रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी टीमों का प्रयास, अपने आप में  कहता है, कि रेस्क्यू हर उस जिंदगी का है जिसमें सांस बाकी है, फिर चाहे वो इंसान हो या कोई जानवर...। 
2. किसी मकान की छत पर बड़े अक्षरों में लिखा थैंक्यू, ये बयां करता है कि सेना के जवानों के लिए जान पर  खेलकर जिंदगी बचाने का प्रयास जितना जरूरी था, उस अनमोल कार्य के लिए उन्हें थैंक्स कहना उससे भी ज्यादा जरूरी। इसे क्या कहा जाए, जो बिना किसी रिश्ते के इंसान का इंसान से सिर्फ इंसानियत का संबंध है... 
 
3. मानवता की तीसरी मिसाल बना ‘ऑपरेशन वॉटर बेबी’,जिसमें बचाव दल ने 4 दिन से में फंसे परिवार के 5 सदस्यों को बचाया। इसमें एक महिला और उसका नवजात शिशु फंसा हुआ था। नवजात शिशु और उसकी मां की चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए बचाव दल के सदस्यों ने सूरज निकलने का इंतजार किया और फिर स्थानीय डॉक्टर की मदद से तड़के अभियान फिर शुरू किया गया। अधिकारी ने बताया कि सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के बाद महिला ने कहा कि वह अपने बच्चे का सेना में भेजेगी।
4. तबाही के बाद, बहते हुए नाले से इस नवजात का सुरक्षित बाहर निकलना, दर्शाता है कि ये अंत नहीं शुरुआत है...मौत के तमाम रास्तों के बीच से निकलते हुए एक जिंदगी फिर मुस्कुराती है...और जीवन अगर बचा है तो फिर से खिलेगा, महकेगा... इस नवजात की तरह...।
5. और इस तस्वीर को कैसे अनदेखा किया जा सकता है, जहां बचाव दल का एक सदस्य अपनी पीठ को सीढ़ी बनाते हुए खुद पानी में लेट गया, ताकि लोग उसपर पैर रखकर रेस्क्यू दल की नाव में चढ़ सकें... रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे ये सदस्य जो भूखे-प्यासे दिन रात इस काम में लगे हैं, सराहना और सम्मान के हकदार हैं... वेबदुनिया इन्हें सलाम करता है...

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