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प्रवीण तोगड़िया क्यों नाराज हैं नरेन्द्र मोदी से...

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विश्व हिन्दू परिषद का अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया की पहचान उनके भड़काऊ भाषणों के लिए है। लेकिन, वही तोगड़िया आंखों में आंसू लिए यह कहें‍ कि मेरे एनकाउंटर की साजिश रची गई तो आश्चर्य स्वाभाविक ही है। गुजरात के रहने वाले तोगड़िया की गिनती देश के शीर्ष हिन्दू नेताओं में होती है। 
 
पारिवारिक पृष्ठभूमि : 12 दिसंबर 1956 को गुजरात में अमरेली जिले के साजन टिंबा गांव में प्रवीण तोगड़िया का जन्म हुआ। कैंसर सर्जन डॉ. तोगड़िया सौराष्ट्र के पटेल हैं और किसान के बेटे हैं। वे यहां से पढ़ाई के सिलसिले में अहमदाबाद पहुंचे और पढ़ाई में हमेशा ही अच्छे रहे। एमबीबीएस और एमएस की डिग्री के बाद उन्होंने करीब 14 साल तक प्रैक्टिस भी की और अहमदाबाद में धनवंतरि हॉस्पीटल के नाम से एक अस्पताल भी शुरू किया। 
 
सार्वजनिक जीवन : तोगड़िया 10 साल की उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे और उन्हें 1979 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंस्वेकों का मुख्य मार्गदर्शक केवल 22 वर्ष की उम्र में चुना गया। उन्हें उनके उत्तेजक और भड़काऊ बयानों के लिए जाना जाता है। हिंदुत्व की व्याख्या का ये उदहारण समेत सटीक विवरण देते हैं। ऐसा कहा जाता है कि बचपन में एक बार उन्हें सोमनाथ मंदिर में जाने का अवसर मिला। जब उन्होंने सोमनाथ के ध्वस्त अवशेष देखे तो उनके जीवन की दिशा ही बदल गई और वे हिन्दुत्व के पुनरुद्दार में लग गए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में वे नरेन्द्र मोदी के सहयोगी भी रहे।
 
तोगड़िया के मुताबिक हिन्दू मजबूत और सैन्य स्थिति में होने के बावजूद सभी धर्मों को सामान दृष्टि से देखता है। 1983 में तोगड़िया विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े।  वर्ष 2003 में अशोक सिंघल द्वारा रिटायरमेंट की घोषणा के बाद अनौपचारिक रूप से तोगड़िया विहिप के मुखिया बन गए, लेकिन 2011 में वे अधिकृत तौर पर विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने। 
 
मोदी से मतभेद : बताया जाता है कि एक वक्त ऐसा भी था जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और तोगड़िया गहरे दोस्त हुआ करते थे और दोनों एक ही स्कूटर से आरएसएस कार्यकर्ताओं से मिलने जाया करते थे। हालांकि वर्ष 2002 में मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनते ही दोनों के संबंधों में कड़वाहट आ गई। कहा तो यह भी जाता है कि 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में विहिप ने परोक्ष रूप से मोदी का विरोध ही किया था। इसके चलते इन दोनों के बीच दूरियां और बढ़ीं। 
 
प्रवीण तोगड़िया चूंकि सौराष्ट्र के पटेल समुदाय से आते हैं, ऐसे में अटकलें यह भी थीं कि हार्दिक पटेल को पर्दे के पीछे से प्रवीण तोगड़िया का भी सहयोग था। इसी 'राजनीतिक शत्रुता' ने मोदी और तोगड़िया के बीच की दरार और चौड़ा करने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा संघ और भाजपा भी चाहते हैं कि तोगड़िया को विहिप के मुखिया पद से हटाया जाए। शायद तोगड़िया की मोदी से नाराजी का यह कारण भी हो सकता है। 
 
विवाद : तोगड़िया चूंकि भड़काऊ भाषणों से ही पहचाने जाते हैं इसलिए उनके साथ विवाद भी कम नहीं जुड़े हुए हैं। उनके विवादित भाषणों के चलते देश के कई राज्यों में उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं। वर्ष 2003 में राजस्थान में उनका त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रम भी काफी सुर्खियों में रहा था, जब लोगों को त्रिशूल बांटे गए थे। चाहे अल्पसंख्‍यक समुदाय को गुजरात दंगे की याद दिलाने की बात हो या फिर हिन्दूओं से मुस्लिम पड़ोसियों को भगाने की बात हो, उनके विवादित बयानों की सूची बहुत लंबी है। 

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