चेन्नई के मरीना बीच पर करुणानिधि का अंतिम संस्कार, 80 साल के सियासी सफर पर पूर्णविराम

बुधवार, 8 अगस्त 2018 (20:15 IST)
चेन्नई। चेन्नई के मरीना बीच पर लाखों लोगों ने द्रविड़ राजनीति के अगुवा मुथुवेल करूणानिधि को आज अंतिम विदाई दी। मद्रास उच्च न्यायालय में पूरी रात चली सुनवाई के बाद आए फैसले के उपरांत सरकार ने अंतत: कलैनार को मरीना पर अंतिम विश्राम की जगह दे दी और लाखों प्रशंसकों, समर्थकों, तमाम हस्तियों की अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के बीच उन्हें दफनाया गया। इस तरह उनके 80 बरस के सियासी कॅरियर पर पूर्णविराम लग गया।
 
 
थलैवर (नेता) को अंतिम विदा देने के लिए पूरे देश के बड़े और रसूखदार लोग आज चेन्नई में जमा थे। बेहद कम उम्र में स्कूल छोड़ने वाले करुणानिधि ने अपने दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन में लेखन, सिनेमा और राजनीति तीनों ही क्षेत्रों में बड़ा नाम बनाया और उनमें अपना अमूल्य योगदान किया।
 
ग्यारह दिन तक अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच चले संघर्ष के बाद 94 वर्षीय करुणानिधि का कल शाम निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव और आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबु नायडू सहित देशभर से तमाम बड़े नेता करूणानिधि को श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
 
माकपा महासचिव सीतारात येचुरी, माकपा नेता प्रकाश करात, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव भी अंतिम यात्रा में मौजूद थे। करुणानिधि का अंतिम संस्कार आज पूरे सैन्य राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
 
पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, राहुल गांधी, केन्द्रीय मंत्री और तमिलनाडु से भाजपा के एकमात्र लोकसभा सदस्य पोन राधाकृष्णन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणस्वामी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने मरीना बीच पर दिवंगत नेता को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
 
करूणानिधि के पुत्र और उनके संभावित उत्तराधिकारी एम. के. स्टालिन को उनके पिता के शरीर पर लिपटातिरंगा सौंपा गया। द्रमुक प्रमुख की पत्नी राजति अम्मल और अन्य पुत्रों तथा पुत्रियों ने अपने पिता के चरणों पर पुष्प अर्पित किये।
 
अंतिम क्षणों की बात करें तो करुणानिधि के शव वाले ताबूत को कब्र में उतारे जाने से पहले स्टालिन ने अपने पिता के पैर छुए और वह रोते रहे। उनकी सबसे छोटी बेटी और राज्यसभा सदस्य कनिमोई ने अंतिम बार अपने पिता के सिर और गालों को बड़े प्रेम से स्पर्श किया।
 
चूंकि करुणानिधि ने स्वयं को नास्तिक और तर्कवादी घोषित किया था, इसलिए उनके अंतिम संस्कार के दौरान कोई हिन्दु रीति-रिवाज नहीं हुआ। 
रास्ते भर गूंजते रहे नारे : तीनों सेनाओं के कर्मियों ने उनके ताबूत को जैसे ही उठाया वैसे ही ‘करुणानिधि अमर रहें’ के नारे गूंजने लगे। सेना के कर्मी उनका पार्थिव देह एक खुली सेना की खुली गाड़ी की ओर लेकर मरीना तट गए। उनके बेटे एम के स्टालिन और तमीझरासू समेत परिवार के अन्य सदस्य नम आंखों के साथ उनके पीछे-पीछे चल रहे थे। पूरे रास्ते में सड़क के दोनों ओर दिवंगत नेता की आखिरी झलक पाने के लिए लोग उमड़े हुए थे।
 
लोगों ने काली कमीज पहनकर जताया शोक : करुणानिधि की अंतिम यात्रा में शामिल सैकड़ों लोगों ने काली कमीज पहनी हुई थी और वे दिवंगत नेता की तस्वीरें और तख्तियों थामे हुए थे। करुणानिधि के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा गया था। उन्हें काला चश्मा, पीली शॉल, सफेद कमीज और धोती पहनाई गई। 

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