बुलेट ट्रेन से पहले तैयार होगी चलाने वालों की फौज

शुक्रवार, 31 अगस्त 2018 (23:06 IST)
वडोदरा। मुंबई-अहमदाबाद के बीच निर्माणाधीन हाईस्पीड रेलवे लाइन वर्ष 2023 में पूरी तरह से परिचालित हो पाएगी और उससे पहले ट्रेन को चलाने के लिए 3,500 कर्मचारियों की फौज तैयार हो जाएगी।
 
 
राष्ट्रीय हाईस्पीड रेलवे निगम के सूत्रों ने शुक्रवार को यहां बताया कि 508 किलोमीटर की इस परियोजना का सूरत से बिलिमोरा तक का 48 किलोमीटर तक का हिस्सा निर्धारित समय से पहले खोला जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर 15 अगस्त 2022 को बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की है लेकिन यदि किसी कारण से देर हुई तो इस छोटे खंड पर बुलेट ट्रेन सेवा का शुभारंभ किया जा सकता है।
 
सूत्रों के अनुसार इस भाग को इसलिए चुना गया है, क्योंकि यह एकदम सीधा खंड होगा और इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से पूरे मार्ग में इस खंड को तैयार करना सबसे आसान है।

मुख्य परियोजना अधिकारी प्रदीप अहिरकर ने बताया कि वडोदरा में जापान के शिन्कान्सेन के सहयोग से निर्माणाधीन हाईस्पीड रेलवे प्रशिक्षण संस्थान अगले साल से काम करना शुरू कर देगा और बुलेट ट्रेन परियोजना के सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल्स इंजीनियरों का प्रशिक्षण आरंभ हो जाएगा।
 
उन्होंने बताया कि जापान में बुलेट ट्रेन के ट्रैक का एक 50 मीटर का ट्रैक मॉडल तैयार किया जा रहा है जिसे दिसंबर तक भारत भेज दिया जाएगा। इससे ट्रैक निर्माण से जुड़े इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण संस्थान 600 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा है।

कुछ समय बाद यहां इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सिगनल का प्रशिक्षण शुरू होगा। यह लक्ष्य रखा गया है कि बुलेट ट्रेन आरंभ होने के पहले देश में इसे संचालित करने के लिए 3,500 पेशेवर तैयार हो जाएं। परिचालन से जुड़े कर्मचारियों को जापान भी भेजा जाएगा।
 
उन्होंने बताया कि 5 मंजिला प्रशिक्षण संस्थान की 2 मंजिलें फरवरी 2019 तक बन जाएंगी और उन्हीं से अल्पकालिक प्रशिक्षण शुरू करने की योजना है, जो 15 दिन से लेकर 3 माह तक का होगा। संस्थान 2020 में पूरा बनकर तैयार हो जाएगा और तब तक जापान से सिमुलेटर भी आ जाएगा तब 2 से 3 साल के दीर्घकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
 
अभी तक 1,500 लोगों को जापान में अल्पकालिक प्रशिक्षण और 40 अफसरों को दीर्घकालिक प्रशिक्षण दिलाया जा चुका है। प्रशिक्षण संस्थान के लिए 200 मास्टर ट्रेनर भी जापान में तैयार किए जाएंगे। इस प्रकार से बुलेट ट्रेन के भारत आने से पहले 3,500 कुशल और प्रशिक्षित लोगों की बड़ी फौज तैयार हो चुकी होगी यानी तब हमें हर बात के लिए जापानी विशेषज्ञों पर निर्भर नहीं रहना होगा।
 
उधर बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए वडोदरा स्टेशन पर निर्माण पूर्व तैयारी आरंभ हो चुकी है। वडोदरा स्टेशन का डिजाइन बनकर तैयार है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 7 को तोड़ा जाएगा और उसे आगे खिसकाकर बनाया जाएगा। उसी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म संख्या 6 एवं 7 के बीच 220 मीटर का गर्डर डाला जाना है, जो पूरी परियोजना में सबसे लंबा गर्डर होगा।
 
बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए प्लेटफॉर्म संख्या 6 पर कुछ इमारतें हटाई जानी हैं। उनके वैकल्पिक भवन निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। वडोदरा में अहमदाबाद से आकर गोधरा-रतलाम की दिशा में जाने वाली गाड़ियों को प्लेटफॉर्म नंबर 7 पर लाया जाता था लेकिन इसे तोड़े जाने की योजना के लिए छायापुरी हॉल्ट को सैटेलाइट स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

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