कैसे कहूँ कि माँ तेरी याद नहीं आती

माँ, अब मैं जान गई हूँ

मैं कृति हूँ माँ की

आँचल इसका खुशियों की फुलवारी

माँ कभी नहीं रूठती

ओ माँ! तुझे सलाम

हर उपहार से बड़ा माँ का उपकार

एक माँ है जो खफा नहीं होती

मैं बेकल तो अम्मा बेकल

शब्दों में कहाँ समाती है माँ

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