चाँदनी की रश्मियों से चित्रित छायाएँ

सिर्फ एक बार

प्रेम हमारा

किसके नाम है वसीयत

खिड़की

चेहरे थे तो दाढ़ियाँ थीं

आखिर कब तक

वजह नहीं थी उसके जीने की

समय गुजरना है बहुत

कपास के पौधे

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