दीपिका जी... सुन रही हैं ना...

चौराहों पर लगी हैं औचित्यहीन लाल बत्तियां

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

सम-विषम अर्थात जलाओ पराली बुझाओ दिवाली

व्यंग्य : छा गई खिचड़ी...

व्यंग्य : लो आ गया नागिन डांस का मौसम!

खाली-पीली ‘हॉर्न प्लीज़’

ट्विटर की जमात और राष्ट्रद्रोह का बवाल

इस जवाब के कई सवाल हैं...

हाय, ये व्हॉट्‍स एप चैटिंग के शॉर्ट फॉर्म

सोमवार, 9 अक्टूबर 2017

व्यंग्य : और मैंने पकड़ लिया चोटी कटवा को!

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