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कोटला में 30 वर्षों से अपराजित है टीम इंडिया

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नई दिल्ली , बुधवार, 29 नवंबर 2017 (21:23 IST)
नई दिल्ली। विश्व की नंबर एक टेस्ट टीम भारत राजधानी दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में पिछले 30 वर्षों के अपने अपराजेय रिकॉर्ड को बरकरार रखते हुए श्रीलंका  के खिलाफ शनिवार से यहां होने वाले तीसरे और अंतिम टेस्ट में भी जीत हासिल कर सीरीज कब्जाने के इरादे से उतरेगी। भारत ने पिछले 30 वर्षों में इस मैदान में 11 टेस्टों में 10 जीते हैं और एक ड्रॉ खेला है।

इस आंकड़े से साबित हो जाता है कि कोटला मैदान पर भारतीय टीम का सिक्का किस कदर चलता है। कोटला मैदान पर पहला टेस्ट 10 नवम्बर 1948 को खेला गया था जो ड्रॉ रहा था। आजादी के एक साल बाद कोटला मैदान पर खेले गए इस मैच से अब तक इस मैदान पर भारत ने 33 टेस्ट टेस्ट खेले हैं, जिसमें से उसने 13 जीते है और छह हारे हैं। इन 13 जीत में से 10 जीत तो भारत को पिछले 30 वर्षों में मिली हैं।
  
श्रीलंकाई टीम ने कोटला मैदान पर 2005 में एकमात्र बार टेस्ट मैच खेला है जिसमें उसे 188 रन से करारी पराजय का सामना करना पड़ा था। श्रीलंका ने कोलकाता में खेले गए पहले टेस्ट में साढ़े तीन दिनों तक सराहनीय संघर्ष दिखाया था लेकिन आखिरी दिन श्रीलंका ने घुटने टेक दिए थे और टीम हार के कगार पर पहुंच कर बच गई थी। 
 
नागपुर में दूसरे टेस्ट में श्रीलंकाई टीम को साढ़े तीन दिन के अंदर पारी और 239 रन से अपनी सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। भारत के पास तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त है और उसका पूरा इरादा रहेगा कि अपने अभेद्य दुर्ग कोटला में श्रीलंका का दूसरी बार शिकार कर सीरीज को 2-0 से जीत लिया जाए।
 
भारत के दूसरे सबसे सफल कप्तान बनने से एक जीत दूर खड़े विराट कोहली अपने घरेलू मैदान में में दूसरी बार टेस्ट मैच में कप्तानी करेंगे। विराट अब तक अपनी कप्तानी में 31 टेस्टों में से 20 टेस्ट जीत चुके हैं और सौरभ गांगुली की बराबरी करने से एक कदम दूर हैं।
 
गांगुली ने 49 टेस्टों में भारत की कप्तानी की थी और 21 मैच जीते थे। गांगुली ने 13 टेस्ट हारे थे और 15 टेस्ट ड्रॉ कराए थे जबकि विराट ने अब तक सिर्फ तीन टेस्ट हारे हैं और आठ टेस्ट ड्रॉ कराए हैं। भारत में सर्वाधिक टेस्ट जीतने का रिकॉर्ड महेंद्र सिंह धोनी के नाम हैं जिन्होंने 60 मैचों में 27 जीते हैं।
 
विराट की कप्तानी में भारत ने कोटला में खेले गए पिछले टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका की मजबूत टीम को 337 रन के विशाल अंतर से हराया था। इस जीत में ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और लेफ्ट आर्म स्पिनर रवींद्र जडेजा ने मैच में कुल सात- सात विकेट लिए थे। नागपुर में खेले गए पिछले टेस्ट में भी अश्विन और जडेजा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। अश्विन ने मैच में आठ और जडेजा ने पांच विकेट लिए थे।
 
भारत कोटला में आखिरी बार नवम्बर 1987 में वेस्ट इंडीज से पांच विकेट से हारा था लेकिन उसके बाद से इस मैदान पर सात टीमों ने टेस्ट खेले हैं पर कोई भी टीम भारत को हारने में सफल नहीं हो पाई है। भारत ने वेस्टइंडीज से 1987 में हारने के बाद से ज़िम्बाब्वे को 1993 में पारी और 13 रन से, 1996 में ऑस्ट्रेलिया को सात विकेट से, 1999 में पाकिस्तान को 212 रन से, 2000 में ज़िम्बाब्वे को सात विकेट से, 2002 में ज़िम्बाब्वे को चार विकेट से, 2005 में श्रीलंका को 188 रन से, 2007 में पकिस्तान को छह विकेट से, 2011 में वेस्टइंडीज को पांच विकेट से, 2013 में ऑस्ट्रेलिया को छह विकेट से और 2015 में दक्षिण अफ्रीका को 337 रन से हराया था।

मौजूदा भारतीय खिलाड़ियों में कोटला मैदान पर अजिंक्य रहाणे ने 235 रन, चेतेश्वर पुजारा ने 176 और विराट कोहली ने 174 रन बनाए हैं। रहाणे कोटला में शतक बना चुके हैं जबकि विराट का सर्वाधिक स्कोर नाबाद 88 और पुजारा का नाबाद 82 रन है।  कोटला पर सर्वाधिक विकेट के मामले में अश्विन तीन मैचों में 23 विकेट के साथ तीसरे नंबर पर हैं। एक पारी में इसी मैदान पर परफेक्ट 10 का रिकॉर्ड बना चुके लेग स्पिनर अनिल कुंबले के सात टेस्टों में 58 विकेट लेकर सबसे आगे हैं जबकि कपिल देव नौ टेस्टों में 32 विकेट के साथ दूसरे स्थान पर हैं। जडेजा के यहां दो टेस्टों में 14 विकेट, उमेश यादव के दो टेस्टों में सात विकेट और इशांत शर्मा के चार टेस्टों में छह विकेट हैं। (वार्ता)

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