विश्व हिन्दी सम्मेलन में हिन्दी को उचित सम्मान दिलाने का संकल्प

सोमवार, 20 अगस्त 2018 (19:51 IST)
गोस्वामी तुलसीदास नगर (मॉरीशस)। हिन्दी को विश्व की अग्रणी भाषाओं में उचित सम्मान दिलाने और संयुक्त राष्ट्र में आधिकारिक भाषा के तौर पर स्थापित कराने के संकल्प के साथ 11वां हिन्दी विश्व सम्मेलन सोमवार को संपन्न हो गया।
 
 
लगभग 2,000 हिन्दी विद्वानों के बीच स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में 3 दिनों तक चले मंथन में हिन्दी के अब तक के विश्वव्यापी सफर पर संतोष व्यक्त किया गया और उसे जन-जन की भाषा बनाने के लिए सामूहिक प्रयास निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन के दौरान हिन्दी के प्रसार के लिए कई अनुशंसाएं की गईं।
 
तकनीक के माध्यम से हिन्दी के विकास को लेकर कई सुझाव आए जिसमें हिन्दी से जुड़े सॉफ्टवेयर को लांच करने और इसके लिए टेक कंपनियों से बातचीत करने की अनुशंसा की गई, साथ ही हिन्दी शब्दों के विस्तार के लिए सॉफ्टवेयर की मदद से 10 हजार शब्दों का ऑनलाइन शब्दकोष बनाने की अनुशंसा भी की गई। हिन्दी में तकनीक को बढ़ाने के उद्देश्य से शोध के लिए अधिक फंड देने की अनुशंसा की गई।
 
अमेरिका में भाषा और संस्कृति के प्रसार के लिए किए गए प्रयासों के अनुरूप दूसरे देशों में भी ऐसा करने की आवश्यकता पर सम्मेलन में बल दिया गया। भारतीय भाषा के लिए एक मापदंड बनाने पर भी सहमति बनी। भाषा को संस्कृति से जोड़ने के लिए सभी देशों में रामायण और रामचरित मानस के पाठन को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई। प्रवासी भारतीयों के बीच भाषा के विकास के लिए युवाओं से अधिक से अधिक संवाद करने के लिए बहुआयामी प्लेटफॉर्म बनाने का भी सुझाव दिया गया।
 
मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ ने कहा कि भाषा और संस्कृति अलग-अलग नहीं हो सकती। संस्कृति की पहचान बरकरार रखने में भाषा का बड़ा योगदान है। हिन्दी भारत की आत्मा है और मॉरीशस को गर्व है कि हिन्दी के प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।
 
जगन्नाथ ने कहा कि भारतीय भाषा के विकास के लिए मॉरीशस ने बराबर काम किया है। पूरे विश्व में हिन्दी सचिवालय भवन के निर्माण के लिए मॉरीशस का चयन किया गया, यह गर्व की बात है। इसका शिलान्यास उनके प्रधानमंत्रित्वकाल में हुआ, यह उनका सौभाग्य है और यह पूर्वजों के प्रति सम्मान है। मॉरीशस की आजादी में इस भाषा का बड़ा योगदान रहा है। मॉरीशस की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक प्रगति में भी हिन्दी का बड़ा योगदान रहा है।
 
पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को हम 'माता' कहते हैं, उस नाते मॉरीशस 'पुत्र' बन जाता है और वह अपना कर्तव्य जानता है। मॉरीशस संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने में पूर्ण समर्थन देगा और अब समय आ गया है कि हिन्दी को अंतरराष्ट्रीय मंच मिले। (वार्ता)

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