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चुनिंदा शायरी: आंखों को 4 कर लेना

हमें फॉलो करें चुनिंदा शायरी: आंखों को 4 कर लेना
अभिषेक कुमार अम्बर
 
1. 
अपनी आंखों को चार कर लेना,
कितना मुश्किल है प्यार कर लेना।
एक दिन लौटकर मैं आऊंगा,
हो सके इंतजार कर लेना।
 
2.
फिर तेरी याद आ गई मुझको,
ख़्वाब कितने दिखा गई मुझको।
करके वादा सदा हंसाने का,
आज वो भी रुला गई मुझको।
 
3.
काश! दिल से उतर गए होते,
सब हदें पार कर गए होते।
सांसें लेना भी छोड़ देते हम,
आप अगर बोलकर गए होते।
 
4.
एक ख़्वाहिश है बस जमाने की,
तेरी आंखों में डूब जाने की।
साथ जब तुम निभा नहीं पाते,
क्या जरूरत थी दिल लगाने की।
 
5.
इस जहां से जब उजाले मिट गए,
दोषियों के दोष काले मिट गए।
क्यों जहां में बढ़ रही हैं नफ़रतें,
क्या मोहब्बत करने वाले मिट गए।

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