घर-घर विराजेंगे श्री गणेश, जानिए स्थापना के सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त कौन से हैं

पं. हेमन्त रिछारिया
13 सितंबर 2018 भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से गणेशोत्सव का प्रारम्भ होगा। सार्वजनिक स्थानों एवं घरों में गणेशजी की प्रतिमाओं की स्थापना व आराधना होगी। इस पर्व का धार्मिक के साथ ही राष्ट्रीय महत्व भी है। हमारे सनातन धर्म में गणेशोत्सव एकमात्र ऐसा पर्व है जिसका संबंध देश के स्वाधीनता संग्राम से है। 
 
गणेशोत्सव का प्रारंभ श्री लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने क्रांतिकारियों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की गुप्त मंत्रणा को ब्रिटिश सरकार से छिपाने के उद्देश्य से किया था। वर्तमान में गणेशोत्सव देश का प्रमुख धार्मिक पर्व है। यह हमें धर्म के साथ-साथ राष्ट्रधर्म से भी जोड़ता है। आइए जानते हैं कि 13 सितंबर के दिन गणेश स्थापना के शुभ मुहूर्त कौन से हैं... 
 
सर्वश्रेष्ठ अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11:50 से 12:40 बजे तक
 
शुभ- प्रात: 6:00 से 7:30 बजे तक
लाभ- दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक
अमृत- दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक
शुभ- दोपहर 4:30 से सायं 6:00 बजे तक
 
सायंकालीन मुहूर्त-
 
अमृत- सायं 6:00 से 7:30 बजे तक
चल- सायं 7:30 से 9:00 बजे तक
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमंत रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केंद्र
संपर्क: astropoint_hbd@yahoo.com

अगर आपके घर भी हैं ये 5 चीजें तो तुरंत बदल डालें, आपको कंगाल बना सकती हैं ये गलतियां

छोटी सी राई हर संकट को रोके, पढ़ें 5 बड़े काम के टोटके

सूर्य को इस तरह जल चढ़ाने से बनते हैं धनवान, जानें 14 खास बातें...

हमारी अधूरी कहानी : मूवी प्रिव्यू

गुजरात में 500 करोड़ का फर्जी जीएसटी बिल घोटाला

सम्बंधित जानकारी

धन और यश पाना चाहते हैं, तो रविवार को करें ये 5 चमत्कारिक उपाय ...

प्रयागराज कुंभ मेले में गंगा स्नान से क्या होगा फायदा?

चंद्र ग्रह को कैसे बनाएं बलशाली, जानिए लाल किताब से...

नागा साधु शरीर पर भभूत क्यों लगाते हैं और यह भभूत कैसे बनी है?

प्रयागराज कुंभ मेला, कौन है हिन्दुओं के असली शंकराचार्य?

ज्योतिष के अनुसार बुध की खास विशेषताएं, जो आप नहीं जानते होंगे...

सुबह उठकर अगर पढ़ लिए ये 10 नमस्कार मंत्र, तो आपको अमीर बनने से कोई नहीं रोक सकता

प्रयागराज कुंभ में प्रसाद और खाना खाने के मजे

बुधवार के दिन कर लें गणेश जी के 5 उपाय, मिलेगा धन, बढ़ेगा व्यापार...सपने होंगे साकार

हनुमानजी ने जब उखाड़ना चाहा रामेश्वरम के ज्योतिर्लिंग को तब टूट गया अभिमान

अगला लेख