अंतरराष्ट्रीय वेश्यावृत्ति रैकेट का पर्दाफाश, 39 नेपाली लड़कियों को चंगुल से छुड़ाया

बुधवार, 1 अगस्त 2018 (09:13 IST)
नई दिल्ली/ वाराणसी। एक संयुक्त अभियान में वाराणसी पुलिस की अपराध शाखा और दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को वसंत विहार पुलिस थाना क्षेत्र में एक मकान पर छापेमारी की और अंतरराष्ट्रीय वेश्यावृत्ति गिरोह के चंगुल से 39 महिलाओं को छुड़ाया। ये महिलाएं नेपाल से तस्‍करी कर यहां लाई गई थीं।


पुलिस ने बताया कि महिलाएं पिछले कुछ दिनों से घर में बंद रखी गई थीं और उन्हें जल्द ही तस्करी के जरिए खाड़ी देशों में भेजा जाने वाला था। उन्होंने इस बाबत पूछताछ के लिए तीन लोगों को हिरासत में लिया है।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि इन महिलाओं को आश्रय गृहों में भेजा जाएगा  और उन्हें वापस भेजने के लिए नेपाली दूतावास से संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को जहां रखा गया था, वहां से 68 पासपोर्ट बरामद किए गए जिनमें से सात भारतीय पासपोर्ट हैं।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि नेपाली महिलाओं को नौकरियों का झांसा दिया गया और उन्हें पहले उत्तर प्रदेश के वाराणसी लाया गया। जुलाई के पहले हफ्ते में दो नेपाली महिलाएं तस्करी करने वालों के चंगुल से  भागने में कामयाब रहीं। उन्होंने नेपाल में पुलिस को इस रैकेट के बारे में बताया, जिसके बाद नेपाल पुलिस ने नेपाल दूतावास से संपर्क किया।

दूतावास की सूचना के आधार पर वाराणसी पुलिस ने पिछले हफ्ते वाराणसी में एक दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की। उन्होंने शिवपुर थाना क्षेत्र से जय सिंह नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान सिंह ने बताया कि नेपाली महिलाओं के एक समूह को तस्करी के जरिए पश्चिम एशिया ले जाया जा रहा है। भागने में कामयाब रहीं दो महिलाओं और सिंह के बयान के आधार पर वाराणसी अपराध शाखा ने दिल्ली पुलिस के साथ अभियान चलाया।

छुड़ाई गई महिलाओं ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष को बताया कि वे नेपाल के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों की रहने वाली हैं। महिला आयोग ने एक बयान में कहा, उन्होंने बताया कि वे बहुत गरीब हैं और नेपाल के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों  की रहने वाली हैं। उनमें से ज्यादातर ने भूकंप में अपने घर-परिवार गंवा दिए हैं। उनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच है।
मालीवाल ने कहा, दिल्ली मानव तस्करी का केंद्र बन गया है। दिल्ली महिला आयोग को इन रैकेटों के बारे में  पता चलता है, अन्य राज्यों की पुलिस को उनके बारे में पता चल जाता है, लेकिन दिल्ली पुलिस सोती रहती है। वाराणसी पुलिस ने मुझे बताया कि मैदान गढ़ी के उस मकान का इस्तेमाल पिछले कई साल से महिलाओं की जत्थों में तस्करी के लिए होता था। स्थानीय पुलिस को इसके बारे में कैसे पता नहीं चला? (एजेंसियां) 

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