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वित्त विधेयक को संसद की मंजूरी

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नई दिल्ली , शुक्रवार, 25 मार्च 2011 (09:14 IST)
वित्त विधेयक 2011 पर विचार कर राज्यसभा द्वारा उसे लोकसभा को लौटाए जाने के साथ ही संसद की ओर से वर्ष 2011-12 के आम बजट को मंजूरी दिए जाने की प्रक्रिया पूरी हो गई।

राज्यसभा ने शुक्रवार को वित्त विधेयक और इससे संबंधित विनियोग विधेयक पर चर्चा के बाद उन्हें लोकसभा को ध्वनिमत से लौटा दिया। लोकसभा इन्हें पहले ही पारित कर चुकी है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को लोकसभा में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट भाषण के साथ आम बजट की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

आम तौर पर संसद के बजट सत्र में दो चरण होते हैं और वित्त विधेयक को दूसरे चरण में मंजूरी दी जाती है। लेकिन इस बार पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के कारण बजट सत्र को संक्षिप्त कर दिया गया। इसके कारण पहले चरण की अवधि का कुछ विस्तार कर बजट प्रक्रिया को पूरा कर लिया गया।

राज्यसभा में वित्त विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि सकल घरेलू उत्पाद की दर नौ प्रतिशत रहेगी जिसमें 0.25 प्रतिशत का अंतर आ सकता है।

उन्होंने मध्यपूर्व और जापान की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई है।

उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे घटनाक्रमों पर ध्यान रखना होता है क्योंकि इनसे कच्चे तेल की कीमतें प्रभावित होती हैं और उसका अर्थव्यवस्था पर सीधा असर होता है।

मुखर्जी ने पेट्रोलियम पदार्थों पर लगने वाले कर की समीक्षा के लिए विपक्षी दलों के सुझावों को खारिज करते हुए कहा कि मूल्य अनुसार कर (एड वेलोरम टैक्स) से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है क्योंकि इससे पूरे कर तंत्र पर विपरीत असर होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के लिए उन्हें सबसे ज्यादा गालियाँ दी जाती हैं लेकिन सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों से जो कर मिलता है उसका काफी बड़ा हिस्सा राज्यों को जाता है।

मुखर्जी ने कहा कि करवसूली सहित राजस्व में वृद्धि और व्यय पर नियंत्रण के जरिए सरकार राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसे परंपरागत नजरिया मानते हैं लेकिन इसके जरिए किसी भी विपरीत स्थिति से निबटने में मदद मिलती है। (भाषा)

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