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रुपया आए कहाँ से, रुपया जाए कहाँ रे

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नई दिल्ली , शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010 (17:51 IST)
बैंकों, दोस्तों या अन्य स्रोतों से उधार लेकर अपनी जरूरतों को पूरा करने वालों में हम आप ही नहीं है, हमारे देश की सरकार भी इसी तर्ज पर चल रही है। सरकार की प्राप्तियों का एक बड़ा हिस्सा उधारी या अन्य देयताओं से आता है और उसका एक बड़ा भाग ब्याज चुकाने में चला जाता है।

अगले वित्त वर्ष के आम बजट के अनुसार सरकार एक रुपए में से 29 पैसे उधारी या अन्य देयताओं के रूप में जुटाएगी। पूर्व वित्त वर्ष में हालाँकि यह राशि 34 पैसे थी। सरकारी बजट के एक रुपए में उधारी व अन्य देयताओं के बाद बड़ा हिस्सा निगमित कर (23 पैसे) तथा गैर कर राजस्व (11 पैसे) का है।

इसके अलावा सरकार को आय के लिहाज से हर रुपए में गैर ऋण पूँजी प्राप्ति से तीन पैसे, सेवा कर व अन्य कर से छह पैसे, केंद्रीय उत्पाद शुल्क से 10 पैसे, सीमा शुल्क से नौ पैसे तथा आयकर से नौ पैसे मिलते हैं।

वहीं देनदारी या खर्च बात की जाए तो सरकार के हर एक रुपए में से 19 पैसे ब्याज अदायगी में चले जाते हैं। खर्च में यह सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा केंद्रीय योजना मद में 21 पैसे तथा करों व शुल्कों में राज्यों के हिस्से के रूप में 16 पैसे जाते हैं।

इसके अलावा सरकार के हर रुपए में से राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों को गैर योजना व योजनागत सहायता मद में क्रमश: चार एवं सात पैसे, अन्य गैर योजनागत व्यय मद में 13 पैसे, सब्सिडी मद में नौ पैसे तथा रक्षा मद में 11 पैसे खर्च होते हैं।

आम बजट (2010-11) में प्रति रुपए के हिसाब से प्राप्तियाँ व खर्च इस प्रकार हैं :
रुपया आता है : उधार व अन्य देयताएँ 29 पैसे, निगमित कर 23 पैसे, कर राजस्व 11 पैसे, केंद्रीय उत्पाद शुल्क 10 पैसे, सीमा शुल्क 09 पैसे आयकर, 09 पैसे सेवा, अन्य कर 06 पैसे, गैर ऋण पूँजी प्राप्तियाँ 03 पैसे।

रुपया जाता है : केंद्रीय आयोजना 21 पैसे, ब्याज अदायगी 19 पैसे कर, शुल्कों में राज्यों का हिस्सा 16 पैसे, अन्य गैर कर व्यय 13 पैसे, रक्षा मद 11 पैसे, सब्सिडी 09 पैसे, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों को योजना सहायता 07 पैसे, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को गैर योजना सहायता 04 पैसे। (भाषा)

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