वैलेंटाइन डे स्पेशल : मोस्ट रोमांटिक मूवीज़

रोमांस के बिना हिंदी फिल्म की कल्पना नहीं की जा सकती। चाहे एक्शन हो या हॉरर, 99 प्रतिशत हिंदी फिल्मों में रोमांस देखने को मिलता है। ऐसे में वैलेंटाइन डे के प्यार भरे माहौल में 'मोस्ट रोमांटिक हिंदी मूवीज' को खोजना बहुत मुश्किल काम है। फिर भी चर्चा करते हैं ऐसी रोमांटिक फिल्मों की जिन्होंने दर्शकों पर अपना खास असर छोड़ा।
 
मुगल-ए-आजम (1960)
 
मुगल राजकुमार सलीम और नृत्य करने वाली अनारकली का रोमांस फिल्म के हर फ्रेम और संवाद में नजर आता है। के. आसिफ द्वारा निर्देशित यह फिल्म बॉलीवुड के इतिहास का मील का पत्थर है। दिलीप कुमार और मधुबाला ने ऐसा अभिनय किया मानो वे एक-दूजे के लिए बने हों। फिल्म का अंत दर्शकों को हिला देता है। मधुबाला से खूबसूरत एक्ट्रेस आज तक बॉलीवुड को नहीं मिली है। इस फिल्म में उनकी खूबसूरती देखते ही बनती है। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की। 2004 में इसे रंगीन कर फिर रिलीज किया गया और रंगीन वर्जन भी सफल रहा।
 
हिट गाने :
प्यार किया तो डरना क्या
मोहब्बत की झूठी 
मोहे पनघट पे 
तेरी महफिल में 
ऐ मोहब्बत जिंदाबाद
 

दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे (1995)
 
यश चोपड़ा के बेटे की फिल्म 'दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे' जब 1995 में रिलीज हुई तो किसी ने भी नहीं सोचा था कि आदित्य इतिहास रचने जा रहे हैं। अधिकतर फिल्मों में हीरो-हीरोइन मां-बाप की मर्जी के खिलाफ घर से भाग कर करते थे, लेकिन आदित्य ने ट्विस्ट ये दिया कि फिल्म के हीरो-हीरोइन शादी केवल माता-पिता की सहमति से ही करना चाहते हैं। आधी विदेश में और आधी देश में इसे फिल्माया गया। शाहरुख खान को इस फिल्म के बाद ही रोमांस का बादशाह कहा जाने लगा। काजोल के साथ उनकी जोड़ी खूब जमी। दोनों का शानदार अभिनय, देसी टच, विदेशी लोकेशन, मधुर संगीत और आदित्य का शानदार निर्देशन दर्शकों के सिर चढ़ा। बॉलीवुड पर चोपड़ा को फिल्म ने मालामाल कर दिया। मुंबई के एक सिनेमाघर में यह फिल्म वर्षों से अभी भी चल रही है। 
 
हिट गीत
मेरे ख्वाबों में
रूक जा ओ दिल दीवाने
हो गया है तुझको 
तुझे देखा तो 
मेहंदी लगा के रखना

बॉबी (1973)
 
अपनी सबसे महत्वाकांक्षी फिल्म मेरा नाम जोकर की असफलता के बाद राज कपूर ने घाटे से उबरने के लिए नए चेहरों के साथ ताजगी भरी रोमांटिक फिल्म बनाने का निर्णय लिया। राज कपूर की हर फिल्म में रोमांस देखने लायक होता है। उनकी फिल्मों के किरदारों का रोमांस दर्शकों को बैचेन कर देता है। बॉबी में टीनएजर्स को राज कपूर ने हीरो-हीरोइन बना दिया और इतने कम उम्र के हीरो-हीरोइन की फिल्म पहली बार दर्शकों ने देखी। बॉबी जैसी बिंदास लड़की इसके पहले हिंदी फिल्म के स्क्रीन पर ज्यादा नहीं देखी गई थी। ऋषि कपूर और डिम्पल कपाड़िया की कच्ची उम्र का प्यार दर्शकों को खूब भाया और यह फिल्म ट्रेंड सेटर बनी। इस फिल्म की सफलता ने राज कपूर को कर्जे से उबार दिया। 
 
हिट गाने
हम तुम एक कमरे में बंद हो
झूठ बोले कौआ काटे
मैं शायर तो नहीं
मुझे कुछ कहना है
ना मांगू सोना चांदी
अखियों को रहने दो

कभी-कभी (1976)
 
रोमांटिक मूवी बनाने में यश चोपड़ा का कोई जवाब नहीं था। अपनी उम्र के आखिरी दौर तक वे रोमांटिक फिल्मों के जरिये दर्शकों का मनोरंजन करते रहे। 1976 तक अमिताभ बच्चन एंग्रीयंग मैन के रूप में स्थापित हो चुके थे और उनकी एक्शन मूवी धूम मचा रही थी। ऐसे में यश चोपड़ा ने उन्हें रोमांटिक रोल सौंप दिया। पीढ़ियों तक फैली रोमांटिक कहानी को यश चोपड़ा ने खूब फिल्माया। फिल्म में अमिताभ बच्चन, राखी, वहीदा रहमान, शशि कपूर, ऋषि कपूर, नीतू सिंह जैसे दिग्गज कलाकार हैं। खय्याम का संगीत उल्लेखनीय है। 
 
हिट गीत 
कभी कभी मेरे दिल में 
मैं पल दो पल का शायर हूं 
मेरे घर आई एक नन्ही परी 
प्यार कर लिया तो क्या
तेरे चेहरे से

एक दूजे के लिए (1981)
 
नए चेहरे के साथ रोमांटिक फिल्म बनाने का फॉर्मूला हमेशा नहीं चलता, लेकिन जब चलता है तो फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित होती है। दक्षिण भारत के सुपरस्टार कमल हासन को हिंदी फिल्मों में रोमांटिक फिल्म 'एक दूजे के लिए' के साथ पेश किया गया। यह तेलुगु फिल्म 'मारो चरित्र' का हिंदी रिमेक है। दो विभिन्न भाषाओं में बात करने वाले लड़के और लड़की की ये प्रेम कहानी है जिसमे वे कठिन परीक्षा भी देते हैं। शुरुआत में फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कमजोर रही क्योंकि फिल्म दु:खद अंत था, लेकिन धीरे-धीरे फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसी रफ्तार पकड़ी कि सफलता के नए कीर्तिमान बना दिए। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का मधुर संगीत और लता-एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज में गाए गीत सुपरहिट रहे। के. बालाचंदर द्वारा निर्देशित इस फिल्म को एक राष्ट्रीय और तीन फिल्मफेअर पुरस्कार मिले। 
 
हिट गीत 
तेरे मेरे बीच में
हम तुम जब मिल जाएंगे
मेरे जीवन साथी
हम बने तुम बने 
सोलह बरस की बाली उमर

मैंने प्यार किया (1989)
 
सूरज बड़जात्या द्वारा निर्देशित यह फिल्म फॉर्मूलाबद्ध थी, लेकिन सूरज के प्रस्तुति करण में ताजगी, लीड पेयर का मासूमियत भरा अभिनय और राम-लक्ष्मण का सुपरहिट संगीत का जादू दर्शकों पर चल गया। इस फिल्म से बॉलीवुड को एक नया सितारा सलमान खान के रूप में मिला। फिल्म को युवाओं को ध्यान में रख कर बनाया गया था और युवाओं के बीच सलमान पोस्टर बॉय बन गए। फिल्म को फिल्मफेअर अवॉर्ड्स में एक दर्जन नॉमिनेशन मिले जिसमें से आधा दर्जन यह जीतने में कामयाब रही। 
 
हिट गीत
दिल दीवाना
कबूतर जा जा
मैंने प्यार किया
आते जाते
आया मौसम दोस्ती का

लम्हे (1991)
 
यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित बेहतरीन फिल्मों में से एक 'लम्हें' बॉक्स ऑफिस पर गच्चा खा गई थी। इस फिल्म की बोल्ड थीम को भारतीय दर्शक पचा नहीं पाए। अपनी बेटी की उम्र से प्यार करने वाली पुरुष की कहानी को समय से आगे का बताया गया। विदेश और अच्छी फिल्मों की समझ रखने वाले दर्शकों ने फिल्म को खूब सराहा। फिल्म को एक राष्ट्रीय और पांच फिल्मफेअर पुरस्कार मिले। श्रीदेवी के करियर की यह बेहतरीन फिल्मों में से एक है। 
 
हिट गाने
कभी मैं कहूं
याद नहीं भुल गया 
मेरी बिंदिया 
ये लम्हे

देवदास (1955)
 
शरतचंद्र चटोपाध्याय के उपन्यास 'देवदास' पर ढेर सारी फिल्में बनी हैं, लेकिन बिमल राय द्वारा निर्देशित 'देवदास' का जवाब नहीं। मूलत: यह प्रेम में डूबे देवदास की त्रासद कथा है, लेकिन प्यार का एक अलग ही रूप इसमें देखने को मिलता है। प्यार में खुद को डूबो कर सजा देने वाले पात्र के रूप में अभिनय सम्राट दिलीप कुमार ने अद्‍भुत अभिनय किया है। फिल्म में सुचित्रा सेन ने पारो और वैजयंतीमाला ने चंद्रमुखी के किरदार निभाए हैं। साहिर लुधियानवी और सचिन देव बर्मन का गीत-संगीत सुनने लायक है। 'देवदास' की गिनती भारत में बनी महान फिल्मों में होती है। 
 
हिट गाने 
किसको खबर थी 
आन मिलो आन मिलो 
मितवा लगी यह कैसी
अब आगे तेरी मर्जी
वो ना आएंगे पलट कर

चोरी-चोरी (1956)
 
हॉलीवुड मूवी इट हैप्पन्ड वन नाइट पर आधारित चोरी-चोरी एक हल्की-फुल्की रोमांटिक मूवी है। राज कपूर और नरगिस की सदाबहार जोड़ी की केमिस्ट्री इस फिल्म में देखने लायक है। 1991 में इसी पर आधारित फिल्म 'दिल है कि मानता नहीं' महेश भट्ट ने बनाई थी। फिल्म की ताजगी और मधुर संगीत इसे आज भी देखने लायक बनाता है। फिल्म का निर्देशन अनंत कुमार ने किया था। 
 
हिट गाने 
आजा सनम
जहां मैं चली आती हूं 
पंछी बनूं उड़ती फिरूं 
रसिक बलमा 
ये रात भीगी भीगी 
ऑल लाइन क्लियर

सिलसिला (1981)
 
यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित सिलसिला बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी। अमिताभ-रेखा-जया का साथ में काम करना जहां बड़ा आकर्षण था, वहीं यह फ्लॉप होने का कारण भी बना। उस समय अमिताभ और रेखा के रोमांस की हवा थी। स्क्रीन पर बजाय जया के रेखा के साथ अमिताभ को रोमांस करते देखना दर्शकों को पसंद नहीं आया। बहरहाल, फिल्म की कहानी और उतार-चढ़ाव बहुत उम्दा थे और परिस्थितियों में फंसे किरदार प्यार और फर्ज में जूझते नजर आए। शिवहरी का संगीत आज भी सुनने लायक है। 
 
हिट गाने
देखा एक ख्वाब
ये कहां आ गए हम
रंग बरसे भीगे चुनरिया 
लड़का है या शोला
नीला आसमान

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