स्मृति आदित्य

योग से मन स्वच्छ हो योग से तन स्वस्थ हो योग पर ना धन खर्च हो योग करें हम योग करें
सेहत का शुभ संयोग हो प्रकृति का सहयोग हो स्वस्थ सारे लोग हो.... योग हो... योग हो ...
आत्महत्या। किसी के लिए हर मुश्किल से बचने का सबसे आसान रास्ता तो किसी के लिए मौत को चुनना सबसे कठिन। मैं यह नहीं कह सकती...
मां इस पृथ्वी पर सबसे ज्यादा उपेक्षित और अकेली प्राणी है। कम से कम इस एक दिन तो उसे उतना समय दिया जाए जिसकी वह हकदार है।
'मां' शब्द की पवित्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि हिन्दू धर्म में देवियों को मां कहकर पुकारते है। बेटी या बहन...
मां से भी कोई माफी मांगता है भला? ना, मां तो वह, जो अपनी होती है, बहुत अच्छी होती है और उससे माफी नहीं मांगी जाती इसीलिए...
भारतीय संस्कृ‍‍ति की पारंपरिक मां बहुत भोली, बहुत भावुक होती है। औपचारिकताओं के प्रतिकूल परिवेश में उसकी सहजता कसमसाती...
माता-पिता की सघन छांव से अधिक सुरक्षित जगह क्या होगी.. ? सुरक्षा की उस कड़ी पहरेदारी में भी अगर सेंध लग जाए तो सोचना होगा...
ना वह हिन्दू थी ना ही मुस्लिम थी। उसकी एक ही पहचान थी वह बेटी थी। ना मंदिर था न मस्जिद थी जहां बलात्कार हुआ वह जगह गंदी...
एक मंदिर था, एक कन्या थी... मंदिरों में कन्या पूजन होता है, पर उस मंदिर में रूदन था तुम्हारा आसिफा....तुम आसिफा थी या अनीता.....
समाज की 4 बड़ी बुराइयां,4 युवतियां और उनकी 4 अधूरी कहानियां....'चार अधूरी बातें' युवा लेखक अभिलेख द्विवेदी का लघु उपन्यास...
रात के अंधेरे में जीवन के गहरे रहस्य छुपे होते हैं। जीवन भी कई बार निराशाओं और अवसाद की काली रात से गुजरता है, लेकिन उस...
जब भी गुड़ी पड़वा पर अपनी जुबान पर नाजुक गुलाबी नीम पत्ती रखती हूँ तो बताशे का स्वाद भी उसी के साथ चला आता है। काश! हमारे...
चैत्र माह से हिन्दू नववर्ष आरंभ होता है। सूर्योपासना के साथ आरोग्य, समृद्धि और पवित्र आचरण की कामना की जाती है।
मुट्‍ठी भर आसमान, एक चुटकी धूप, अँजुरी भर हवा और थोड़ी-सी जमीन, जहाँ वह अपने कदमों को आत्मविश्वास के साथ रख सके। बस इससे...
रसिया, द डांस ऑफ डिजायर में वह सब है जो एक नाजुक मन पढ़ना चाहता है, जो एक सच्चा कलाकार महसूस करता है, जो अपने रिश्तों में...
मधुबाला! भारतीय रजतपट की वीनस! वीनस यानी शुक्र। आकाश का सबसे अद्वितीय सितारा। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि शुक्र कलात्मक...
प्रार्थना से अभिभूत होकर भगवान महाकाल स्थिर रूप से वहीं विराजित हो गए और समूची अवंतिका नगरी शिवमय हो गई।
जरा सोचें कि देश में हम रहते हैं, इससे सबकुछ लेते हैं पर इसे क्या देते हैं सिवाय कचरा, कूड़ा और अपशिष्ट के.... इसी तरह राष्ट्र...
एक सुहाना सजीला मौसम हम पर से होकर गुजर जाता है और हमें नहीं इतनी फुर्सत की ठिठककर उसकी कच्ची-करारी सुगंध को भीतर उतार...
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