प्रज्ञा पाठक

क्या किसी के मन में कभी यह विचार आता है कि कभी अपने मन की भी सेल्फी लें? देखें कि वहां कौन-कौन से भावों का साम्राज्य विस्तार...
चंद सुविधाएं पत्नी को उपलब्ध कराकर वो यह समझता है कि उससे बेहतर पति दुनिया में अन्य कोई नहीं और इनके लिए वह निरंतर पत्नी...
मैक्सिको के चिचीकुइला शहर के महापौर अल्फांसो मोंटीएल ने अपने चुनावी प्रचार में शहर के विकास हेतु जनता से अनेक वादे...
पाकिस्तान के बाहरिया विश्वविद्यालय ने छात्र छात्राओं को कक्षा व कैंपस में साथ बैठने की स्थिति में परस्पर 6 इंच की दूरी...
हाल ही में एक ऐसी लड़की से मेरी भेंट हुई जो किसी निजी कारण से बहुत दुखी थी। उस तनाव में अक्सर अस्वस्थ रहने लगी थी और कई...
हिंदुओं के लिए पूज्यनीय ऐसे शिव पार्वती के स्वरुप में व्यक्ति विशेष का प्रदर्शन सर्वथा अनुचित है।
आभार व्यक्त तो कीजिए। फिर देखिए, उसकी सुगंध कैसे आपके रिश्तों को अद्भुत स्नेह से सींचती है और आपका जीवन कितना आनंद पूर्ण...
अरे कापुरुषों ! तनिक विचार तो करो, जब महिला हर रूप में आपके लिए आवश्यक है तो क्यों उस पर अत्याचार करते हो?
थोड़ा समय अपने शौक को देंगे तो आपको अपना आराम और मनोरंजन पूर्ण महसूस होगा।
हाल ही में 12वीं के नतीजे घोषित हुए। आत्महत्याओं का दौर एक बार पुनः चल पड़ा। अनुत्तीर्ण होने की निराशा इस कदर आजकल के...
जीवन के प्रत्येक क्षण को अंतिम क्षण मानकर उसे सहज भाव से जीते चलने में ही जीवन का आनंद है।
एक दिन हरे और भगवे रंग में विवाद छिड़ गया। हरा रंग गुर्राकर बोला-
इस हड़ताल में आम जनता का पूरा ख्याल रखा गया। एक भी बस नहीं रोकी गई बल्कि उन्हें जनता के लिए निःशुल्क कर दिया गया।
आज के यांत्रिक युग में ऐसी छोटी मदद भी बड़ा सुकून दे जाती है। हम अपने दैनंदिन जीवन में अत्यंत सरलता से इसका आनंद ले सकते...
क्या आपने कभी सोचा है कि मन के रूप में कितनी अद्भुत चीज़ हमारे पास है।कहते हैं ना, 'मन के हारे हार है,मन के जीते जीत।'
तोता और मैना अपनी मधुर प्रेमवार्ता में तल्लीन थे। मैना मान भरे स्वर में बोली-"देखो,शादी के बाद मुझे एक बड़ाssssssssss सा घर बनवा...
सच्ची धार्मिकता माता-पिता की सेवा करने में है, पतिगृह की समुचित देखभाल में है, यथाशक्ति मानवता के कल्याण हेतु कर्म करने...
ज़ीरो डे उस दिन को कहा जाता है जब पानी पूर्णतः समाप्त हो जाएगा। उस दिन हमारे घरों के नलों में एक बूंद पानी नहीं आएगा।
पृथ्वी पर जब जीवन-क्रम आरम्भ हुआ,तब उसका समीकरण था-प्रकृति+मनुष्य=जीवन।
सब कुछ अच्छा,ज्ञानवर्धक, लेकिन एक चीज़ पूरे कार्यक्रम के दौरान खटकती रही और वो थी समय-सीमा का पालन नहीं होना।
LOADING