तरसेम कौर

स्कूली बच्चों ने अपनी-अपनी कक्षा की अंति‍म और निर्णायक परिक्षाओं के लिए उल्टी गिनती गिननी शुरू कर दी है। कक्षा एक, अध्यापक...
हम सभी लोग सपने देखते हैं। नींद में देखे गए सपने हमारी कल्पनाएं और कभी हमारी चिंताएं होती हैं। इन सपनों को हम सुबह उठते...
क्या आपको शर्म महसूस होती है कि आप अच्छी इंग्लिश नहीं बोल पाते या आपको अपने बच्चे का एडमिशन कराना है एक अच्छे पब्लिक...
कैसे बनेगा मेरा भारत महान...!! जिसकी राजधानी दिल्ली में कचरे के ढेर पहाड़ के रूप ले चुके हैं। किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं...
हमारा भारत देश कभी कृषि प्रधान देश कहलाता था। ज्यादा आबादी गांवों में ही बसती थी। पर पिछले कुछ दो-एक दशकों में भारत की...
डिलीट होती जा रही भावनाओं और संवेदनाओं का बैकअप शायद किसी ने भी नहीं रखा है
हवाएं करती हैं प्रतीक्षा किसी सुगंध के आने की ताकि वो भी सुगंधित हो सकें चांद करता है प्रतीक्षा
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वैशाख एवं ज्येष्ठ का माह भारत में ग्रीष्म ऋतु कहलाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार माह अप्रैल...
संतुष्ट‍ि' एक बड़ा ही प्यारा और आनंदित कर जाने वाला शब्द है। संतुष्टि मस्तिष्क की उस अवस्था को दर्शाता है, जब भीतर से...
छोड़ देते हैं मस्तियों को, नादानियों को नहीं देखते उन सपनों को जो सूरज और चांद को छूने का दिलासा दिलाते हैं दबा देते...
आजकल बचाने वाले कम हैं, मारने वाले ज्यादा हो गए हैं, हर कोई नजर गड़ाए बैठा है
हमारी जिंदगी का हर दिन हमें एक नया पाठ पढ़ा कर जाता है। रोज कितने ही किस्से जुड़ते हैं...कुछ भूल जाने वाले और कोई कोई मन और...
चांद की आंखों में भरा हुआ है, चांद का सारा पानी, पृथ्वी का एक अकेला चांद, देखता है पूरी पृथ्वी का पानी सूख गया है
नारी जीवन....आंखों से रूठी नींद, बोझिल सी पलकें, पहाड़-सी जि‍म्मेदारियां ढोती
जितना घिसती हूं, उतना निखरती हूं, परमेश्वर ने बनाया है मुझको, कुछ अलग ही मिट्टी से
पर्स में रखे चंद नोटों और कुछ खनकते सिक्कों जितनी ही बच गई हैं ख्वाहिशें और दिन चढ़ते वो भी हो जाती हैं पराई
एक बड़ा सा आलीशान पुराना घर था। वहां करीब चालीस बरस की एक औरत अपने पति, एक बेटे और एक बेटी के साथ रहती थी। उसके चेहरे पर...
हर दुःख का कोई कारण हो यह आवश्यक नहीं...कुछ दुःख अकारण भी होते हैं, बिना कारण नेत्रों का नम हो जाना, ऐसा कुछ विचार उग आना,...