डॉ. आशीष जैन

Dr Ashish Jain
आगामी सप्ताहांत गुजरात में समुद्र एवं पृथ्वी की विपरीत दिशाओं से दो दो तूफान आने वाले हैं। देखना होगा की कौन अधिक तबाही...
दिल्ली के भीतर ही एक दिल्ली और है। यहाँ सामान्य जन नहीं वरन असामान्य व्यवस्थाएँ रहती हैं। ‘अंग्रेज़ो के जमाने के’ वास्तुशिल्पी...

मैं और मेरा स्थायी विपक्ष

गुरुवार, 23 नवंबर 2017
मैं स्वयं को इस घर की राजनीति में सत्ता पक्ष का दर्जा देता हूँ। मजेदार बात यह है कि श्रीमतीजी की भी यही राय है स्वयं अपने...
जब नीचे लिख ही दिया है कि ‘जगह मिलने पर साइड दी जाएगी’ तो ‘हॉर्न प्लीज’ लिखने की क्या जरूरत है? और जब हॉर्न प्लीज लिखा...
'भक्त' सौ सुनार की और एक लोहार की साबित हुआ है जबकि 'राष्ट्रद्रोह' दहले पर नहला ही रह गया। मैं बताता हूं कैसे- भक्त, एक सौम्य...
कक्षा नौवीं की गणित में प्रमेय सिद्ध करना सिखाते हैं। जो लोग शौकिया तौर पर हिन्दी पढ़ते हैं, उनके लिए बता दूं कि प्रमेय...
चौराहों पर लगी ये लाल बत्तियां सिगरेट के डब्बे पर लिखी हुई वैधानिक चेतावनियों से अधिक कुछ भी नहीं। ऐसा प्राय: उन चौराहों...
सुलु हमारे चारों ओर है। हर घर में है। सरल और सुलझी हुई 'तुम्हारी सुलु' में कोई नायक या नायिका नहीं है, ना ही कोई व्याभिचारी...
विषम परिस्थितियों में ताबड़तोड़ थोपे गए निरर्थक समाधान को ही ‘सम-विषम’ कहा जाता है। दिल्लीवाले आम आदमी इसे ऑड़-ईवन, औड-एवेन...