डॉ. आशीष जैन

Dr Ashish Jain
बही-खातों में जब छोटे-छोटे घपले टाले जाते हैं, तो वो घोटाले बन जाते हैं। आशावादी भारतीय लोकतंत्र में घोटाला होना एक शुभ...
जो सज्जन इसे पढ़ सकते हैं, बहुत संभव है वो इसे समझ नहीं सकेंगे। यद्यपि पढ़ना शिक्षित होना दर्शाता है वरन, समझना समझदारी।...
उद्‍घाटन कार्यक्रम के पश्चात मंत्रीजी ने टीवी कैमरे की ओर जिस धृष्टता से देखा तभी लग गया था कि फीता तो कट गया अब नाक...
जब माताश्री के नारे ‘गरीबी हटाओ’ से गरीबी हट गई तब सुपुत्रश्री ने राजनीति में आते ही घोषणा कर दी - ‘मेरा भारत महान'। चूंकि...
दिवाली पर प्रदूषण के निरंतर बढ़ते स्तर का स्वयं संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च माननीय ने पटाखों पर निषेधाज्ञा लागू कर दिवाली...
जब से गुजरात व एक अन्य किसी प्रदेश के चुनावों के अपेक्षित परिणाम, अनपेक्षित रूप से घोषित हुए हैं, तब से जीवन सूना-सूना...
बधाइयों और शुभकामनाओं का जब ‘व्हाट्स एप’ पर यकायक तांता लग जाए और मोबाइल की घंटी अनवरत घनघनाने लगे तो नया साल आ ही गया...
चौराहे जाम, मुख्य मार्ग जाम, देखते ही देखते जाम छलक गया गलियों में। पुलिसकर्मी नदारद, लाल बत्तियाँ गुल, व्यवस्था धुआँ-धुआँ।...
प्रत्येक बोले जाने वाले बोल का मोल होता है अत: उसका व्यय तोल-तोलकर ही करना उचित है। बोल सस्ते भी होते हैं और महंगे भी।...
कुछ दिनों पूर्व एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई जिसमें 22 सप्ताह के 2 अपरिपक्व भ्रूणों को जन्म के पश्चात असंवेदनशीलता से...
आगामी सप्ताहांत गुजरात में समुद्र एवं पृथ्वी की विपरीत दिशाओं से दो दो तूफान आने वाले हैं। देखना होगा की कौन अधिक तबाही...
दिल्ली के भीतर ही एक दिल्ली और है। यहाँ सामान्य जन नहीं वरन असामान्य व्यवस्थाएँ रहती हैं। ‘अंग्रेज़ो के जमाने के’ वास्तुशिल्पी...

मैं और मेरा स्थायी विपक्ष

गुरुवार, 23 नवंबर 2017
मैं स्वयं को इस घर की राजनीति में सत्ता पक्ष का दर्जा देता हूँ। मजेदार बात यह है कि श्रीमतीजी की भी यही राय है स्वयं अपने...
जब नीचे लिख ही दिया है कि ‘जगह मिलने पर साइड दी जाएगी’ तो ‘हॉर्न प्लीज’ लिखने की क्या जरूरत है? और जब हॉर्न प्लीज लिखा...
'भक्त' सौ सुनार की और एक लोहार की साबित हुआ है जबकि 'राष्ट्रद्रोह' दहले पर नहला ही रह गया। मैं बताता हूं कैसे- भक्त, एक सौम्य...
कक्षा नौवीं की गणित में प्रमेय सिद्ध करना सिखाते हैं। जो लोग शौकिया तौर पर हिन्दी पढ़ते हैं, उनके लिए बता दूं कि प्रमेय...
चौराहों पर लगी ये लाल बत्तियां सिगरेट के डब्बे पर लिखी हुई वैधानिक चेतावनियों से अधिक कुछ भी नहीं। ऐसा प्राय: उन चौराहों...
सुलु हमारे चारों ओर है। हर घर में है। सरल और सुलझी हुई 'तुम्हारी सुलु' में कोई नायक या नायिका नहीं है, ना ही कोई व्याभिचारी...
विषम परिस्थितियों में ताबड़तोड़ थोपे गए निरर्थक समाधान को ही ‘सम-विषम’ कहा जाता है। दिल्लीवाले आम आदमी इसे ऑड़-ईवन, औड-एवेन...