डॉ अर्पण जैन 'अविचल'

पत्रकार एवं स्तंभकार
भारत एक न केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है बल्कि भारत के भारत होने के मतलब में ही भारतीयता संस्कार निहित है। संस्कार और संस्कृति...
भारत बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक समन्वय वाला राष्ट्र है, जहां 'कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर वाणी' बदल जाती है। किंतु...
इंटरनेट की इस दुनिया ने पाठकों की पहुंच और पठन की आदत दोनों ही बदल दी है। इसी के चलते प्रकाशन और लेखकों का नजरिया भी बदलने...