लाल किताब : भूलकर भी यह न करें, हो जाएंगे बर्बाद

ला‍ल किताब दुनिया की सबसे रहस्यमयी और कठिन विद्या है। बहुत कम लोग इस विद्या के जानकार है। कुछ लोग ऐसे है जो कि लाल किताब के उपाय भी बताते हैं और वैदिक ज्योतिष के भी जो कि अनुचित है। हम आपको बताने जा रहे हैं लाल किताब में बताए गए वर्जित कार्यों के बारे में जो कि कुंडली के ग्रहों पर आधारित है। फिर भी इन उपायों को आजमाने के पहले आप लाल किताब के विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें।
 
सूर्य
*सप्तम/अष्टम सूर्य हो तो ताम्बे का और सुबह-शाम को दान नहीं दें।
*सूर्य बलवान होने पर सूर्य की वस्तुएं सोना, गेहूं, गुड़ व तांबे का दान नहीं दें।
*सूर्य-चंद्रमा ग्यारहवें भाव में हो तो शराब व मांस का सेवन न करें।
*सूर्य पांचवें भाव में है तो संतान को त्रास न दें।
*पिता, ताऊ और पूर्वज को सम्मान नहीं देता है तो बर्बादी।
 
चंद्र
*चंद्र छठे भाव में है तो भूलकर भी दूध या पानी का दान न करें।
*चंद्र बलवान होने पर चांदी, मोती, चावल आदि का दान न करें।
*बारहवें भाव में चन्द्र हो तो साधुओं का संग करना अशुभ 
और भिखारियों को नित्य भोजन न कराएं।
*माता और मौसी को सुखी नहीं रखते हैं तो बर्बादी।
*चंद्र चतुर्थ भाव में है तो कभी भी दूध, जल अथवा दवा का मूल्य नहीं लें।
*चंद्र-केतु एक साथ हो तो किसी के पेशाब के ऊपर पेशाब न करें।
 
मंगल 
*चौथे भाव में मंगल बैठा हो तो वस्त्र का दान नहीं करें।
*मंगल बलवान होने पर मिठाई, गुड़, शहद आदि मंगल की वस्तुओं का दान न दें।
*नित्य मांस खाते रहने से भी मंगल खराब होकर व्यक्ति को बर्बाद कर देता है।
*भाई, मित्र और रिश्तेदारों से झगड़ा करते रहते हैं तो बर्बादी।
 
बुध
*बुध छठे या अष्टम में है तो बेटी और बहनों से खराब संबंध नहीं रखना चाहिए।
*सूर्य-बुध की युति ग्यारहवें भाव में हो तो अपने घर में कोई किराएदार न रखें।
*बुध चौथे भाव में हो तो घर में तोता नहीं पालें।
*बुध-शुक्र की युति हो तो गादी पर न सोएं।
*बुध बलवान होने पर- कलम का दान न करें।
*बहन, बुआ, बेटी, साली और ननिहाल पक्ष से संबंध खराब है तो बर्बादी।
*वाणी खराब, झूठ बोलते या गप्प लड़ाते हैं तो व्यापार और नौकरी में नुकसान।
बृहस्पति 
*गुरु सप्तम भाव में हो तो कपड़ों का दान न करें।
*गुरु दशम या चौथे भाव में है तो घर या बाहर मंदिर न बनवाएं।
*गुरु नवम भाव में है तो मंदिर आदि में दान नहीं करना चाहिए।
*गुरु पांचवें भाव में है तो धन का दान नहीं करना चाहिए।
*गुरु बलवान होने पर- पुस्तकों का उपहार नहीं देना चाहिए। 
*पिता, दादा, गुरु, देवता का सम्मान नहीं करता है तो बर्बादी।
*झूठ बोलने और धोखा देने से भी बर्बादी।
 
 
शुक्र
*बुध-शुक्र की युति हो तो गादी पर न सोएं।
*नाखून और शरीर के छिद्रों को साफ न रखने से बर्बादी।
*शुक्र बलवान होने पर सिले हुए सुंदर वस्त्र, सेंट और आभूषण उपहार में न दें। 
*शुक्र भाग्य भाव में हो तो पढ़ाई के लिए छात्रवृति, पुस्तकें व दवा के लिए दान नहीं करें।
*पत्नी या किसी अन्य स्त्री से संबंध खराब है तो किसी भी प्रकार का सुख नहीं मिलेगा।
 
शनि
*शनि अष्टम भाव में हो तो किसी के लिए मुफ्त आवास का निर्माण न करें।
*शनि लग्न में व गुरु पंचम में हो तो कभी भी ताम्बे का दान नहीं करें। 
*शनि बलवान होने पर शनि की वस्तु शराब दूसरों को न पिलाएं।
*शनि, आठवें भाव में हो तो भोजन, वस्त्र या जूते आदि का दान न करें।
*शनि प्रथम तथा गुरु पंचम में हो तो तांबे का दान न करें। 
*दूसरा घर खाली हो तथा आठवें में अकेला शनि हो तो मंदिर न जाएं।
*यदि 6, 8, 12 भाव में शत्रु ग्रह हो तथा भाव 2 खाली हो तो भी मंदिर न जाएं।
*ब्याज लेना, पराई स्त्री से संबंध और शराब पीने से बर्बादी।
*काका, मामा, सेवक और नौकर से संबंध खराब है तो नुकसान होगा।
 
राहु
*ससुराल पक्ष से खराब संबंध रखने से बर्बादी।
*भोजन कक्ष में ही भोजन नहीं कर रहे हैं तो नुकसान होगा।
*शौचालय, सीढ़ियां और स्नानघर को गंदा रखने से बर्बादी।
*राहु दूसरे भाव में हो तो तेल व चिकनाई वाली चीजों का दान न करें।
*एक बार भवन निर्माण शुरू हो जाए तो उसे बीच में ना रोकें, 
*अन्यथा अधूरे मकान में राहु का वास हो जाएगा। 
 
केतु
*केतु सातवें में हो तो लोहे का दान नहीं करना चाहिए।
*तीसरे भाव में केतु हो तो दक्षिणमुखी घर में न रहें।
*चंद्र-केतु एक साथ हो तो किसी के पेशाब के ऊपर पेशाब ना करें।
*कभी कुत्ते को दुत्कारना या मारना नहीं चाहिए।
*संतान और नाना पक्ष से संबंध खराब न रखें।
*झूठ बोलना, वचन ना निभाने से बर्बादी।

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